कुरुक्षेत्र में धरने पर बैठे कर्मचारियों से यूनियन नेताओं ने की मुलाकात, मांगों को बताया पूरी तरह न्यायसंगत
कुरुक्षेत्र। राजेन्द्र कैम | The India Speaks
पीजीआईएमएस रोहतक के आंदोलनरत अनुबंधित कर्मचारियों को मनरेगा मजदूर यूनियन का खुला समर्थन मिला है। सोमवार को मनरेगा मजदूर यूनियन के राज्य प्रधान कामरेड नरेश कुमार एवं महासचिव कामरेड सोमनाथ ने कुरुक्षेत्र के स्थानीय थीम पार्क में चल रहे धरने स्थल पर पहुंचकर कर्मचारियों से मुलाकात की और उनके संघर्ष को पूर्ण समर्थन देने का ऐलान किया।
धरने पर बैठे कर्मचारियों ने यूनियन नेताओं को बताया कि हरियाणा सरकार एवं पीजीआईएमएस रोहतक प्रशासन लंबे समय से अनुबंधित कर्मचारियों का शोषण कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि वे 2 जून 2025 से लगातार यह मांग कर रहे हैं कि उन्हें सरकार की कौशल रोजगार कर्मचारी नीति के अंतर्गत शामिल किया जाए, लेकिन उनकी न्यायसंगत मांगों को लगातार अनदेखा किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री से मिलने गए कर्मचारियों पर पुलिसिया कार्रवाई का आरोप
कर्मचारियों ने बताया कि वे अपनी समस्याएं रखने की उम्मीद में मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के कुरुक्षेत्र स्थित निवास पर पहुंचे थे, लेकिन उनकी बात सुने जाने के बजाय पुलिस के माध्यम से दमनात्मक कार्रवाई की गई।
कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें जबरन बसों में भरकर रोहतक भेज दिया गया, जिसके बाद वे कड़ाके की ठंड में खुले आसमान के नीचे थीम पार्क में धरना देने को मजबूर हैं।
“हम अपनी जायज मांगों को लेकर मुख्यमंत्री से मिलना चाहते थे, लेकिन हमारी आवाज दबाने के लिए पुलिस का सहारा लिया गया।”
— आंदोलनरत कर्मचारी
इस अवसर पर मनरेगा मजदूर यूनियन के राज्य प्रधान कामरेड नरेश कुमार एवं महासचिव कामरेड सोमनाथ (सदस्य, केंद्रीय कोऑर्डिनेटर टीम—मासा) ने मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के रवैये की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की मांगें पूरी तरह न्यायसंगत हैं और उन्हें मानने के बजाय पुलिसिया दमन का सहारा लेना अत्यंत निंदनीय है।
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“यह सरकार के लिए बेहद शर्मनाक है कि महिला कर्मचारी भी ठंड में खुले आसमान के नीचे धरने पर बैठने को मजबूर हैं।”
— कामरेड नरेश कुमार
यूनियन नेताओं ने कहा कि ये अनुबंधित कर्मचारी पिछले 10 से 20 वर्षों से संस्थान में सेवाएं दे रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें ठेकेदारों के हवाले कर शोषण की खुली छूट देना सरासर अन्याय है।
मनरेगा मजदूर यूनियन ने हरियाणा सरकार से मांग की कि वह तुरंत कर्मचारी-विरोधी नीति त्यागे और सभी अनुबंधित कर्मचारियों की मांगों को स्वीकार करे।
यूनियन नेताओं ने स्पष्ट किया कि मनरेगा मजदूर यूनियन संघर्षरत कर्मचारियों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है और जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।












