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इस्लामाबाद की ‘अवैध’ कब्ज़ेदारी पर फिर उठे सवाल, गिलगित-बाल्टिस्तान में मानवाधिकार हनन का मुद्दा गरमाया

नई दिल्ली/इस्लामाबाद: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और विशेष रूप से गिलगित-बाल्टिस्तान में हाल ही में हुए बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों ने पाकिस्तान की नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इन विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए भारत ने पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला है और कहा है कि इन अशांति के लिए पाकिस्तान की दमनकारी नीतियां और स्थानीय लोगों के खिलाफ शोषण जिम्मेदार है।

​भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने एक प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि PoK में स्थानीय आबादी पाकिस्तान के अवैध कब्जे और उनके मूल अधिकारों के हनन के खिलाफ उठ खड़ी हुई है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इन विरोध प्रदर्शनों का संज्ञान लेने और पाकिस्तान को मानवाधिकारों का सम्मान करने के लिए जवाबदेह ठहराने का आग्रह किया है।

विरोध प्रदर्शनों की जड़ें:

​गिलगित-बाल्टिस्तान और PoK के अन्य हिस्सों में हफ्तों से चल रहे इन प्रदर्शनों में हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए हैं। इन प्रदर्शनों के पीछे कई कारण हैं:

  1. संसाधनों का शोषण: स्थानीय लोगों का आरोप है कि पाकिस्तान उनकी प्राकृतिक संपदा, विशेष रूप से पनबिजली और खनिज संसाधनों का दोहन कर रहा है, लेकिन क्षेत्र के विकास या स्थानीय आबादी को इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा है।
  2. महंगाई और बिजली कटौती: PoK में अत्यधिक महंगाई, बढ़ती बेरोजगारी और बिजली की गंभीर कमी ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है।
  3. मानवाधिकारों का हनन: स्थानीय कार्यकर्ताओं का दावा है कि पाकिस्तानी सेना और प्रशासन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर लगाम लगा रहे हैं और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों को बलपूर्वक दबाया जा रहा है। राजनीतिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों को बिना किसी उचित प्रक्रिया के हिरासत में लिया जा रहा है।
  4. पाकिस्तानी पंजाब का प्रभुत्व: स्थानीय लोगों में यह भावना प्रबल है कि उन्हें पाकिस्तानी पंजाब के लोगों के मुकाबले दोयम दर्जे का नागरिक समझा जाता है और उनके हितों की अनदेखी की जाती है।
  5. भारत में विलय की मांग: कुछ प्रदर्शनकारियों ने तो भारत के साथ विलय की मांग करते हुए नारे भी लगाए हैं, जिससे पाकिस्तान सरकार की चिंताएं और बढ़ गई हैं।

भारत का दृढ़ रुख:

​भारत हमेशा से PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान को अपना अभिन्न अंग मानता रहा है, जिस पर पाकिस्तान ने अवैध रूप से कब्जा कर रखा है। इन विरोध प्रदर्शनों ने भारत को इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर फिर से उठाने का मौका दिया है। भारत ने पाकिस्तान से इन क्षेत्रों पर से अपना अवैध कब्जा तुरंत छोड़ने और वहां के लोगों के मानवाधिकारों का सम्मान करने का आह्वान किया है।

​ये प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहे हैं जब पाकिस्तान स्वयं आर्थिक संकट और आंतरिक राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है। PoK में बढ़ती अशांति पाकिस्तान के लिए एक नई चुनौती पेश करती है, खासकर जब भारत इस क्षेत्र में हो रहे मानवाधिकार हनन और दमनकारी नीतियों को उजागर करने के लिए लगातार आवाज उठा रहा है।

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