आईटीआई करनाल में आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में बाबूजी के योगदान को किया गया याद, नामकरण और मोबाइल पुस्तकालय योजना की रखी मांग
करनाल। राजेंद्र करनाल | The India Speaks
महान स्वतंत्रता सेनानी और हरियाणा के गांधी कहे जाने वाले बाबू मूलचंद जैन की 28वीं पुण्यतिथि पर शनिवार को राजकीय आईटीआई परिसर में उनकी प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर संस्थान के प्राचार्य, स्टाफ, छात्र, स्वतंत्रता सेनानियों के उत्तराधिकारी, बाबू मूल चंद जैन मेमोरियल चैरिटेबल ट्रस्ट के सदस्य और गणमान्य व्यक्तियों ने पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया।
राष्ट्रीय सम्मान की मांग
कार्यक्रम में पारित प्रस्ताव में कहा गया कि बाबू मूलचंद जैन को उनकी राष्ट्र के प्रति सेवाओं को देखते हुए मरणोपरांत राष्ट्रीय सम्मान दिया जाए। साथ ही उनकी सक्रिय भूमिका को ध्यान में रखते हुए सरकार से मांग की गई कि उनके नाम पर गांव-गांव में मोबाइल पुस्तकालय योजना शुरू की जाए।
बाबूजी के आदर्श और प्रेरणा
इस अवसर पर आईटीआई संस्थान के प्रिंसिपल राकेश भाटिया ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि “बाबूजी उसूलों के क़ायल और उच्च कोटि के राजनेता थे। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। संस्थान का नामकरण उनके नाम पर होने से छात्रों को प्रेरणा मिलेगी।”
मुख्य अतिथि पूर्व विधायक लहरी सिंह ने कहा कि “छात्रों और युवाओं को बाबूजी के जीवन से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ना चाहिए।”
भावुक स्मृतियाँ और संबोधन
स्वामी प्रेम मूर्ति, कांग्रेस सेवा दल के दीपक चौधरी, महासचिव तरुण चौहान और पत्रकार शैलेंद्र जैन सहित अन्य वक्ताओं ने बाबूजी के साथ अपने संबंधों को याद किया। इस अवसर पर बाबू मूलचंद जैन के पुत्र अशोक जैन एडवोकेट ने कहा कि “बाबूजी ने मूल्यों को संरक्षित करने का प्रयास किया और हरियाणा का पहला पुस्तकालय अपने पैतृक घर में खोला। उनकी पुण्यतिथि पर उनके दिखाए मार्ग पर चलना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।”
श्रद्धांजलि और धन्यवाद
कार्यक्रम के अंत में आईटीआई के इंस्ट्रक्टर ललित कुमार और जिला बार एसोसिएशन की ओर से एडवोकेट सुरेश चौधरी ने आए हुए अतिथियों का धन्यवाद किया। इस अवसर पर कांग्रेस सेवा दल के अनिल शर्मा, बलजीत चौहान, पूर्व डीईओ सपना जैन, एडवोकेट महेंद्र मान, यशपाल अरोड़ा, कुलबीस सिंह, मनोहर लाल, आशीष अरोड़ा, आईटीआई के छात्र राजन, अंतरा, अनीशा और अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।












