बनास नदी बनी जीवनदायिनी से “बजरी माफियाओं” की आय का जरिया, प्रशासन मौन!
खण्डार (सवाईमाधोपुर)। सत्यनारायण शर्मा | The India Speaks
सवाईमाधोपुर जिले के खण्डार क्षेत्र में बजरी का अवैध कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है। जिले से होकर बहने वाली बनास नदी, जो क्षेत्र की जीवनदायिनी नदी मानी जाती है, अब अवैध बजरी खनन का केंद्र बन चुकी है। रात 12 बजे के बाद यहां डम्पर और ट्रैक्टर-ट्रॉलियां बजरी से लदी सड़कों पर दौड़ती नजर आती हैं — मानो प्रशासन की आंखों पर पट्टी बंधी हो।
रात के अंधेरे में चलता है रेत का कारोबार
स्थानीय लोगों के अनुसार, खण्डार क्षेत्र में बजरी माफिया रात के समय नदी से अवैध रूप से रेत निकालते हैं और फिर उसे डम्पर व ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरकर बाहर भेज दिया जाता है।
यह कारोबार न केवल राजस्थान बल्कि मध्यप्रदेश के श्योपुर कला, शिवपुरी और बिजयपुर जैसे इलाकों तक फैला हुआ है।
प्रशासन बना मूकदर्शक
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि बजरी के अवैध परिवहन की जानकारी पुलिस प्रशासन और खनिज विभाग को भलीभांति है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही।
“रात में बजरी से भरे वाहन सड़कों पर बेखौफ चलते हैं, लेकिन प्रशासन मानो आंखें मूंदे बैठा है।”
स्थानीय नागरिकों का यह कहना क्षेत्र में गूंज रहा है।
बरवाड़ा में हादसे से नहीं सीखा सबक
कुछ दिन पहले सवाईमाधोपुर के चौथ का बरवाड़ा क्षेत्र में बजरी से भरे वाहन ने स्कूल वैन को टक्कर मार दी थी, जिसमें कई बच्चे घायल हो गए थे। इसके बावजूद प्रशासनिक अमला खामोश है।
ऐसा प्रतीत होता है कि खण्डार और आसपास के इलाकों में मुख्य व्यवसाय अब बजरी खनन ही बन चुका है।
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स्थानीय लोगों की मांग
क्षेत्र के जागरूक नागरिकों ने जिला प्रशासन और खनिज विभाग से मांग की है कि अवैध बजरी खनन पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि पर्यावरण और जनजीवन दोनों को बचाया जा सके।












