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बच्चों के ₹5000 के सुंदर रावण ने खोली नगरपालिका के लाखों के बजट की पोल; भ्रष्टाचार के आरोप!

सत्यनारायण शर्मा (हरदेनिया)

खण्डार, राजस्थान।

​खण्डार में इस वर्ष विजयादशमी का पर्व असत्य पर सत्य की विजय के बजाय भ्रष्टाचार बनाम पारदर्शिता की बहस का केंद्र बन गया है। नगरपालिका खण्डार के तत्वावधान में आयोजित दशहरा पर्व में 45 फुट के रावण सहित कुम्भकर्ण और मेघनाद के पुतले खड़े किए गए, जिसके लिए इस बार बजट में ₹2 लाख का इजाफा किया गया था। लेकिन पुतलों के दहन के बाद जो दृश्य सामने आया, उसने प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

दहन के बाद सामने आई ‘विचित्र’ विफलता

​गुरुवार को उपखंड उपजिला मजिस्ट्रेट सुशीला देवी और अधिशासी अधिकारी पुष्कर सिंह सहित हजारों नागरिकों की उपस्थिति में जब रावण दहन किया गया, तो पुतलों के अंदर की लकड़ी (बाँस) पूरी तरह से नहीं जल पाई। तीनों पुतलों के अवशेष देखने के बाद यह स्पष्ट हो गया कि पुतलों का निर्माण घटिया सामग्री से किया गया था। नागरिकों ने सीधे तौर पर यह आरोप लगाया कि यह “रावण के पुतलों में भी भ्रष्टाचार” का मामला है।

​दहन के तुरंत बाद, पुतलों के अवशेषों को ठेकेदार के आदमी आनन-फानन में हटाते नजर आए, जिसने इन आरोपों को और बल दिया।

अधिकारी का गीला बाँस वाला तर्क, जनता का जवाब

​इस मामले पर जब संवाददाता सत्यनारायण शर्मा ने नगरपालिका अधिशासी अधिकारी पुष्कर सिंह से बात की, तो उन्होंने इसका कारण बारिश की बूँदों को बताया। उन्होंने कहा कि “बरसात की थोड़ी बूंद आने से पुतलों के अंदर का बाँस गीला था, इसलिए पुतलों का दहन नहीं हो पाया।”

​हालांकि, स्थानीय नागरिक इस तर्क से सहमत नहीं दिखे। उन्होंने कहा कि पुतलों को देखकर ही लग रहा था कि बजट की आवंटित राशि पूरी तरह खर्च नहीं की गई है।

बच्चों के ₹5000 के रावण ने खोली प्रशासन की पोल

​इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा झटका नगरपालिका को तब लगा, जब सामने आया कि स्थानीय बच्चों ने मात्र ₹5,000 के बजट में लगभग 12.5 फीट का ज्यादा सुंदर रावण का पुतला बनाकर तैयार कर लिया।

​जनता अब सीधे नगरपालिका प्रशासन से सवाल पूछ रही है कि जब छोटे-छोटे बच्चों द्वारा इतने कम पैसों में बेहतर और सुंदर रावण बन सकता है, तो लाखों का बजट होने के बावजूद नगरपालिका इतना घटिया पुतला क्यों बनवा पाई?

​स्थानीय लोगों का कहना है कि यह घटना इस बात का प्रमाण है कि खण्डार नगरपालिका की जनता जागरूक नहीं है, जिसका फायदा उठाकर प्रशासन अपनी मनमर्जी चला रहा है और जनता को जगह-जगह गुमराह किया जा रहा है।

खण्डार नगरपालिका का भार सरकार के खेमे में होने से जनता का प्रशासन से स्पष्ट जवाब मांगना उचित है: क्या सरकार पूरे बजट को हजम करना चाहती है?

इस पूरे मामले पर आपकी क्या राय है? क्या आपको लगता है कि लाखों के बजट में हुई यह विफलता महज एक ‘तकनीकी खामी’ थी? कमेंट बॉक्समें अपनी राय दे

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