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सवाईमाधोपुर, राजस्थान: सत्यनारायण शर्मा/द इंडिया स्पीक्स

​प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महत्वाकांक्षी ‘स्वच्छ भारत अभियान’ की सवाईमाधोपुर जिला मुख्यालय पर सरेआम धज्जियां उड़ रही हैं। आलम यह है कि जिस कलेक्ट्रेट परिसर में जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक (SP) और जिला न्यायालय जैसे तमाम बड़े प्रशासनिक कार्यालय मौजूद हैं, वहीं सार्वजनिक मूत्रालय गंदगी से चोक पड़े हैं, जिनमें सफाई के बजाय शराब की खाली बोतलें भरी मिली हैं।

​इंसान यहाँ अपनी “नेचुरल कॉल” (शौच/पेशाब) को रोकने के लिए मजबूर है, जिससे जिले भर से आने वाले आम नागरिक, वकील और सरकारी कर्मचारी बेहद शर्मिंदगी और परेशानी झेल रहे हैं।

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​🏛️ प्रशासनिक हृदयस्थल, लेकिन गंदगी का घर

​सवाईमाधोपुर कलेक्ट्रेट परिसर जिले का सबसे महत्वपूर्ण और व्यस्त क्षेत्र है। यहाँ पर:

  • जिला न्यायालय (District Court)
  • पुलिस अधीक्षक कार्यालय (SP Office)
  • कलेक्टर कार्यालय (Collectorate)
  • ​तमाम जिला मुख्यालय के प्रमुख कार्यालय
  • ​एडवोकेट, डीडराइटर, फोटो कॉपी की दुकानें और स्टाम्प विक्रेता

​इन सभी के कारण यहाँ पूरे जिले के लोगों का चौबीसों घंटे आना-जाना लगा रहता है। लेकिन, परिसर के लगभग सभी मूत्रालयों की हालत इतनी दयनीय है कि गंदगी और बदबू के कारण कोई उनके पास भी नहीं जा सकता।

​🍾 रात में शराबियों का अड्डा, सुबह जनता परेशान

​स्थानीय निवासियों और वकीलों का कहना है कि बदहाली की मुख्य वजह रात के समय की अराजकता है। वरिष्ठ वकीलों के अनुसार:

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​”यहाँ रात को शराबियों का अड्डा बन जाता है। सुबह जब लोग आते हैं तो मूत्रालयों में शराब की बोतलें भरी पड़ी मिलती हैं। साफ-सफाई बिल्कुल नहीं होती। इससे यहाँ आने वाली महिलाओं और आम जनता को सबसे ज्यादा परेशानी होती है।”

​🤷‍♂️ जिम्मेदारी तय करने में प्रशासनिक विफलता

​सबसे बड़ा और गंभीर सवाल यह है कि जिलाधीश (कलेक्टर) और पुलिस अधीक्षक की नाक की सीध में यह गंदगी पसरी है, लेकिन इसकी जिम्मेदारी लेने को कोई तैयार नहीं है।

बार काउंसिल के अध्यक्ष और वरिष्ठ वकील से जब इस विषय में बात की गई, तो उन्होंने बताया कि:

​”हम इस विषय में कई बार नगर परिषद में शिकायत कर चुके हैं। लेकिन वे कहते हैं कि यह परिसर पीडब्ल्यूडी (PWD) की जिम्मेदारी है। वहीं, जब हम पीडब्ल्यूडी अधिकारियों से बात करते हैं, तो वे अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए वापस नगर परिषद को जिम्मेदार ठहरा देते हैं। जिला प्रशासन की लापरवाही देखिए कि कलेक्टर की नाक के नीचे ही यह तय नहीं हो पा रहा है कि सफाई की जिम्मेदारी आखिर किसकी है!”

​❓ सवाल: बाकी देश का क्या होगा हाल?

​जब जिले के सर्वोच्च प्रशासनिक केंद्र, जहाँ स्वयं कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक बैठते हैं, वहाँ स्वच्छ भारत अभियान इस तरह दम तोड़ता नजर आ रहा है, तो सहज ही यह सवाल उठता है कि जिले के दूर-दराज के गाँवों और शेष देश के सार्वजनिक स्थानों का क्या हाल होगा? यह स्थिति न केवल प्रशासनिक विफलता को दर्शाती है, बल्कि सरकार के एक राष्ट्रीय अभियान की भी खुलेआम खिल्ली उड़ाती है।

जनता की मांग है कि जिला प्रशासन तत्काल इस मामले में हस्तक्षेप करे और 24 घंटे के भीतर सफाई की जिम्मेदारी तय करते हुए कलेक्ट्रेट परिसर को गंदगी मुक्त कराए।

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