सवाईमाधोपुर, खण्डार | संवाददाता सत्यनारायण शर्मा
खण्डार कस्बे में नगरपालिका कार्यालय के ठीक पीछे स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय चतरपुरा अब अतिक्रमण की चपेट में आ चुका है। स्कूल के गेट पर ताले तोड़े जा चुके हैं और अब यह भवन स्थानीय लोगों द्वारा जानवरों के चारा-भंडारण और गोबर फेंकने का अड्डा बन गया है।


पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा छात्र संख्या कम होने पर कई शासकीय विद्यालयों को मर्ज किया गया था। मर्ज प्रक्रिया से मध्यान्ह भोजन योजना और शिक्षक-स्टाफ के संतुलन पर तो सुधार हुआ, लेकिन जो भवन बंद हुए, उनके रखरखाव की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों को सौंपी गई थी, उन्होंने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया।
अब हालात यह हैं कि इन भवनों में अतिक्रमण हो रहा है, भवनों का उपयोग गैर-शैक्षणिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है और सरकारी संपत्ति धीरे-धीरे बर्बाद हो रही है। चतरपुरा स्कूल इसका ताजा उदाहरण है।
सरकारी अनदेखी का दुष्परिणाम
राजस्थान के कई जिलों में सरकारी स्कूलों की हालत खराब है। झालावाड़ में स्कूल की छत गिरने से बच्चों की मौत का मामला भी सामने आ चुका है। और अब, मर्ज किए गए स्कूलों की अनदेखी के चलते सरकार को अरबों रुपए की संपत्ति का नुकसान झेलना पड़ रहा है।
जिम्मेदार अधिकारी पल्ला झाड़ते नजर आए
जब The India Speaks संवाददाता ने संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों से इस पर बात करनी चाही, तो उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि विभाग को पत्र लिख दिया जाएगा। कोई ठोस कार्यवाही या समयसीमा तय नहीं की गई।












