📍 कोलकाता/दीघा, 26 जून 2025
✍️ The India Speaks डेस्क
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा 30 अप्रैल को दीघा में उद्घाटित नए जगन्नाथ मंदिर को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। लगभग ₹250 करोड़ की लागत से बने इस मंदिर को ओडिशा के प्रसिद्ध पुरी जगन्नाथ मंदिर की तर्ज पर विकसित किया गया है, लेकिन इसकी हर पहलू पर राजनीतिक और सांस्कृतिक बहस छिड़ गई है।
🔹 नामकरण से शुरू हुआ विवाद
मंदिर के उद्घाटन से पहले ही इसका “जगन्नाथ धाम” नाम चर्चा में आ गया था। ओडिशा सरकार ने इस नामकरण को लेकर राज्य सरकार को आपत्ति पत्र भी भेजा था, जिसमें धार्मिक विरासत और सांस्कृतिक अस्मिता से जुड़ी चिंताओं का उल्लेख किया गया।
🔹 प्रतिमाओं की लकड़ी पर भी सवाल
विवाद यहीं नहीं थमा। ओडिशा के पुरी मंदिर की पवित्र लकड़ी का उपयोग कथित रूप से इस मंदिर में की गई मूर्तियों के निर्माण में किया गया, ऐसा आरोप भी सामने आया। हालाँकि, इस पर अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन धार्मिक संगठनों और कई पुरातत्व विशेषज्ञों ने इस पर नाराज़गी जताई है।
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🔹 घर-घर प्रसाद योजना पर नई बहस
अब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से जगन्नाथ धाम के प्रसाद को घर-घर पहुँचाने की योजना की घोषणा पर भी विवाद खड़ा हो गया है। कुछ धार्मिक समूहों का कहना है कि इससे पारंपरिक मान्यताओं का उल्लंघन हो सकता है, जबकि विपक्षी दल बीजेपी ने इसे राजनीतिक स्टंट बताया है।
🔹 भाजपा ने साधा निशाना
राज्य में विपक्ष की भूमिका निभा रही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस पूरे प्रोजेक्ट को चुनावी लाभ के लिए किया गया कदम बताया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि राज्य सरकार धार्मिक भावनाओं का राजनीतिक इस्तेमाल कर रही है, जबकि मूल जगन्नाथ संस्कृति और ओडिशा की पहचान को नजरअंदाज किया जा रहा है।
निष्कर्ष:
दीघा का नया जगन्नाथ धाम बंगाल की धार्मिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक धरातल पर चर्चा का विषय बना हुआ है। नामकरण, मूर्ति निर्माण और अब प्रसाद वितरण जैसे मामलों ने इसे राजनीतिक घमासान में बदल दिया है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इन आरोपों पर क्या जवाब देती है और क्या इस परियोजना से जुड़े विवादों का कोई समाधान निकल पाता है या नहीं।
📢 Source: BBC Hindi रिपोर्ट
📅 अपडेटेड: 26 जून 2025












