रिपोर्ट: इंदौर/ गुरुवार 23 अक्टूबर 2025
चेतावनी: 150 रु. का जानलेवा ‘खिलौना’ बना परिवारों के लिए मातम
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में दीपावली के उल्लास को एक सस्ते, मगर बेहद घातक कैल्शियम कार्बाइड गन (Carbide Gun) ने ग्रहण लगा दिया है। दिवाली के बाद से अब तक 60 से अधिक बच्चे इस देसी विस्फोटक की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं, जिनमें से कई की आँखों की रोशनी स्थायी रूप से जाने का खतरा मंडरा रहा है।
भोपाल के प्रमुख अस्पतालों, जैसे एम्स और हमीदिया, में 8 से 14 वर्ष के बच्चों का इलाज चल रहा है। चिकित्सा अधिकारियों के अनुसार, पूरे प्रदेश में इस गन से घायल हुए लोगों की संख्या 125 से अधिक है।
कैसे काम करता है यह जानलेवा ‘जुगाड़’?
यह तथाकथित ‘गन’ एक साधारण प्लास्टिक या पीवीसी पाइप, एक गैस लाइटर और प्रतिबंधित कैल्शियम कार्बाइड के टुकड़े से बनाई जाती है।
खतरा बिंदु विवरण:
- विस्फोट का कारण: कैल्शियम कार्बाइड जब पानी या नमी के संपर्क में आता है, तो अत्यधिक ज्वलनशील एसिटिलीन गैस (Acetylene Gas) उत्पन्न होती है। छोटी सी चिंगारी मिलते ही यह गैस भयंकर विस्फोट करती है।
- चोट की प्रकृति: विस्फोट से प्लास्टिक पाइप के बारीक टुकड़े या कार्बाइड के कण छर्रों (Shrapnel) की तरह उड़ते हैं, जो सीधे आँख के कॉर्निया (Cornea) को चीरते हुए अंदर तक गंभीर चोट पहुँचाते हैं।
- गंभीर परिणाम: कई बच्चे गन के न फटने पर उसकी नाल में झाँककर देख रहे थे, तभी विस्फोट हुआ और उनकी आँख की रोशनी 95% तक चली गई। डॉक्टरों को कई मामलों में कॉर्निया ट्रांसप्लांट करने की आवश्यकता पड़ सकती है।
प्रशासन की चेतावनी हुई बेअसर
- मुख्यमंत्री का निर्देश: मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दीवाली से पहले ही सभी जिलाधिकारियों और पुलिस प्रमुखों को सख्त निर्देश दिए थे कि वे इस खतरनाक ‘कार्बाइड पाइप गन’ की बिक्री को तुरंत रोकें।
- बाजार में आसान उपलब्धता: इसके बावजूद, यह ‘खिलौना’ बाजार में आसानी से उपलब्ध रहा और सोशल मीडिया के ‘फन ट्रेंड’ के कारण बच्चों के हाथों तक पहुँच गया।
- अभिभावकों का रोष: घायल बच्चों के परिवारों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है और मांग की है कि इसे बनाने व बेचने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
यह घटना दिखाती है कि एक सस्ते और देसी जुगाड़ ने दीवाली की खुशियों को किस तरह मातम में बदल दिया है और प्रशासन के लिए प्रतिबंधित सामग्री की बिक्री रोकना कितनी बड़ी चुनौती है।
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द इंडिया स्पीक्स डेस्क












