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चमकौर के युद्ध में अद्भुत बलिदान को शबद-कीर्तन और कथा के माध्यम से किया गया स्मरण

बड़वाह। The India Speaks Desk

सिक्खों के दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के साहेबजादों की शहादत को समर्पित एक विशेष दीवान का आयोजन रविवार शाम को बड़वाह गुरुद्वारा साहेब में श्रद्धा और गरिमा के साथ किया गया। दीवान में बड़ी संख्या में संगत उपस्थित रही और शबद-कीर्तन व कथा के माध्यम से साहेबजादों के बलिदान को स्मरण किया गया।

गुरुद्वारा प्रबंध समिति के अध्यक्ष सरदार रविंदर सिंह भाटिया ने बताया कि यह दिन सिख इतिहास में अत्यंत गौरवपूर्ण और प्रेरणादायक है। इसी दिन चमकौर के युद्ध में गुरु गोबिंद सिंह जी के दो बड़े साहेबजादों सहित 34 अन्य सिखों ने धर्म और सत्य की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी।

शबद और कथा से जीवंत हुआ इतिहास

समिति के सचिव द्वय सरदार मनप्रीत सिंह एवं सरदार सतविंदर सिंह ने बताया कि इस विशेष दीवान में मुक्तसर (पंजाब) से पधारे ज्ञानी गुरप्रीत सिंह जी के जत्थे ने शबद-कीर्तन और कथा-व्याख्यान के माध्यम से साहेबजादों की अद्वितीय शहादत का भावपूर्ण वर्णन किया।
उन्होंने बताया कि चमकौर का युद्ध वीरता, धर्म के प्रति अटूट आस्था और सर्वोच्च बलिदान का प्रतीक है, जिसका उल्लेख स्वयं गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपने ऐतिहासिक पत्र ‘ज़फ़रनामा’ में भी किया है। कथा-कीर्तन के दौरान संगत भाव-विभोर हो गई।

इस विशेष दीवान में समाज के बच्चे, युवा एवं वरिष्ठजन बड़ी संख्या में शामिल हुए और गुरु साहेब के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

अंत में समिति द्वारा दीवान में उपस्थित समस्त संगत का आभार व्यक्त किया गया तथा भविष्य में आयोजित होने वाले धार्मिक कार्यक्रमों में भी बढ़-चढ़कर सहभागिता करने की अपील की गई।

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