जल जीवन मिशन के दावों पर सवाल, नगरपालिका बनने के बाद भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित कस्बा
सवाई माधोपुर। सत्यनारायण शर्मा। The India Speaks Desk
राजस्थान सरकार और कई स्वयंसेवी संस्थाएं जहां एक ओर प्रकृति संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और जल जीवन मिशन के तहत पानी बचाने के लिए बड़े-बड़े अभियान चला रही हैं, वहीं दूसरी ओर सवाई माधोपुर जिले के खण्डार कस्बे में पानी की खुलेआम बर्बादी सरकारी तंत्र की संवेदनहीनता को उजागर कर रही है।
खण्डार तहसील कार्यालय की नाक के ठीक सामने, पुराने ग्राम पंचायत कार्यालय से सटी पानी की टंकी पिछले कई महीनों से फूटी हुई है। हालात यह हैं कि दिन भर उस टंकी से पानी बहता रहता है और प्रतिदिन हजारों लीटर कीमती पानी सड़क और नालियों में बहकर बर्बाद हो रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार इस समस्या को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों और प्रशासन को अवगत कराया गया, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। गौरतलब है कि करीब डेढ़ महीने पहले तक नगरपालिका अधिशासी अधिकारी का प्रभार स्वयं नायब तहसीलदार खण्डार के पास था, और वर्तमान में भी खण्डार में अधिशासी अधिकारी नियुक्त हैं, इसके बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर भी उठे सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र के जनप्रतिनिधि अधिकतर सम्मान समारोहों में साफा और हार पहनते नजर आते हैं, लेकिन जब कोई आम नागरिक समस्या लेकर पहुंचता है, तो उसे राजनीतिक चश्मे से देखा जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि शिकायत करने पर विधायक महोदय द्वारा यह तक कह दिया जाता है—
“तुम बीजेपी के आदमी नहीं हो”
📞 7772828778 | 7723024600
इस बयान ने एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या गैर-राजनीतिक या गैर-पार्टी समर्थक नागरिकों को अपनी समस्याएं उठाने का अधिकार नहीं है?
तहसील कार्यालय के सामने ही पानी की टंकी से हो रही बर्बादी यह दर्शाती है कि अधिकारियों की निगाहें जमीनी हकीकत से कितनी दूर हैं। जब कार्यालय की दहलीज पर यह स्थिति है, तो दूरदराज़ इलाकों की हालत का अंदाज़ा सहज ही लगाया जा सकता है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस गंभीर मुद्दे पर कब तक आंखें मूंदे रखते हैं, या फिर जल जीवन मिशन सिर्फ कागज़ों तक ही सीमित रहेगा।











