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एमएसएमई प्रोत्साहन योजना से मिली नई उड़ान, गांव से शुरू हुई हरित ऊर्जा की कहानी

खरगोन, 24 दिसंबर 2025। द इंडिया स्पीक्स
मेहनत, स्पष्ट सोच और सरकारी योजनाओं के सही उपयोग से आत्मनिर्भरता का सपना साकार किया जा सकता है। खरगोन जिले के ग्राम पिपरी (गंधावड रोड) की रहने वाली महिला उद्यमी श्रीमती प्रभा पाटीदार ने यह साबित कर दिखाया है। उन्होंने प्रदूषण मुक्त मेसर्स मां भवानी बायो एनर्जी इकाई स्थापित कर न केवल स्वयं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और रोजगार सृजन की दिशा में भी उल्लेखनीय पहल की है।

कक्षा 10वीं तक शिक्षित प्रभा पाटीदार ने अपने पति के सहयोग से 1.18 करोड़ रुपये के पूंजी निवेश के साथ 12 मार्च 2025 को बायो एनर्जी इकाई का उत्पादन प्रारंभ किया। इस परियोजना के लिए उन्हें सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से वित्तीय सहायता प्राप्त हुई, वहीं मध्य प्रदेश सरकार की एमएसएमई प्रोत्साहन योजना 2025 का भी लाभ मिला। वर्तमान में इस इकाई के माध्यम से 7 अन्य लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है।

पर्यावरण संरक्षण के साथ औद्योगिक विकास का मॉडल

मेसर्स मां भवानी बायो एनर्जी की प्रोप्रायटर प्रभा पाटीदार का उद्देश्य शुरू से ही ऐसा उद्योग स्थापित करना था, जिससे पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे। इसी सोच के साथ उन्होंने बायो एनर्जी आधारित उद्योग को चुना। इस इकाई में ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध किसानों के वेस्टेज चारा और भूसे से बायोमास ब्रिकेट्स का निर्माण किया जाता है, जो कोयले का पर्यावरण अनुकूल विकल्प है।

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भारत जैसे कृषि प्रधान देश में कृषि और वानिकी अवशेष प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। यही कारण है कि केंद्र और राज्य सरकारें इस प्रकार के हरित उद्योगों को बढ़ावा दे रही हैं। बायोमास ब्रिकेट्स न केवल लागत प्रभावी हैं, बल्कि इनके उपयोग से औद्योगिक प्रदूषण में भी उल्लेखनीय कमी आती है।

फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्री, केमिकल प्लांट और डिस्टिलरीज जैसे कई उद्योग अपने बॉयलरों में ईंधन के रूप में बायोमास ब्रिकेट्स का उपयोग कर रहे हैं। पारंपरिक कोयले की तुलना में ये ब्रिकेट्स कम कार्बन डाइऑक्साइड और ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन करते हैं, जिससे पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है।

महिला उद्यमी प्रभा पाटीदार की यह सफलता कहानी न केवल ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि सही योजना, सरकारी सहयोग और दृढ़ संकल्प से गांव स्तर पर भी आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल उद्योगों की स्थापना संभव है।

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