सरपंच ने सौंपे दस्तावेज, जनपद पंचायत में की शिकायत
बड़वाह, 15 जुलाई 2025| रितेश दुबे की रिपोर्ट
बड़वाह ब्लॉक की कस्बा पंचायत एक बार फिर विवादों में है। पंचायत की वर्तमान सरपंच चेतना राजेश पाटीदार ने वर्ष 2017 में पूर्व सचिव सुनील प्रजापत और अन्य बाहरी लोगों पर फर्जी फर्मों के ज़रिए लाखों रुपये के भुगतान का आरोप लगाया है। शिकायत जनपद पंचायत बड़वाह की सीईओ कंचन डोंगरे को सौंपते हुए कार्रवाई की मांग की गई है।
फर्जी बिल, फर्जी सप्लायर्स और बिना GST/टिन नंबर के भुगतान
शिकायत में बताया गया कि उस समय के सचिव द्वारा कई ऐसे बिलों का भुगतान किया गया जिनमें न तो GST नंबर दर्ज था और न ही टिन नंबर। कुछ मामलों में तो जिनके पास ट्रैक्टर ट्रॉली तक नहीं है, उनके नाम से रेत और गिट्टी सप्लाई के बिल क्लेम कर दिए गए।
उदाहरण स्वरूप:
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श्याम सिंह रावत को ₹16,000 का गिट्टी सप्लाई भुगतान जबकि वह केवल मज़दूरी करता है।
मनोहर शंकर को ₹16,000 रेत सप्लाई के लिए दिए गए जबकि उनके पास ट्रैक्टर नहीं है।
मदन गौड़ के नाम ₹1,09,180 रेत, गिट्टी और मुरम सप्लाई के नाम पर भुगतान हुआ, जबकि वे भी श्रमिक हैं।
पोस्ट पर एक ही मोबाइल नंबर, मिलीभगत का आरोप
सरपंच पाटीदार ने यह भी बताया कि वर्ष 2017 में तत्कालीन सरपंच अफसाना बानो और सचिव सुनील प्रजापत – दोनों के मोबाइल नंबर शासन के पोर्टल पर एक जैसे दर्ज किए गए। यह तकनीकी गड़बड़ी नहीं बल्कि कथित रूप से जानबूझकर की गई अनियमिता है।
फोटो कॉपी की दुकान से सीमेंट सप्लाई?
शिकायत में “नर्मदे हर” नामक फर्म के ₹1,21,176 के बिल का भी उल्लेख है। यह नाम दरअसल एक फोटो कॉपी दुकान से जुड़ा है, लेकिन इसके नाम पर भी सीमेंट सप्लाई का फर्जी बिल क्लेम किया गया। वहीं, संतोष मालवीय के नाम से भी भुगतान दर्शाया गया, जबकि उनके पास सीमेंट या निर्माण सामग्री सप्लाई से जुड़ा कोई व्यवसाय नहीं है।
नियमों को ताक पर रख भुगतान, जांच की मांग
सरपंच द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों में कई ऐसे भुगतान दर्शाए गए हैं जिनमें शासन के अनिवार्य प्रावधानों – जैसे वैध जीएसटी नंबर, कार्य निष्पादन प्रमाण – का पालन नहीं किया गया। शिकायत में मांग की गई है कि दोषियों से वसूली की जाए और मामले की निष्पक्ष जांच हो।
जनपद पंचायत बड़वाह की सीईओ कंचन डोंगरे ने बताया कि दस्तावेज प्राप्त हुए हैं और उन्हें जांच के लिए जिला पंचायत को भेजा जाएगा।
पूर्व सचिव का पक्ष
पूर्व सचिव सुनील प्रजापत ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा –
“मेरे चार से पांच माह के कार्यकाल में पंचायत में निर्माण कार्य हुए थे जिनका भुगतान शासन के नियमानुसार किया गया।”












