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शर्मनाक हरकत : आरआई आरक्षक से करवाते थे कुत्तों की रखवाली

“कुत्ता-बच्चा सँभालने से लेकर पत्नी के सामने मारपीट तक… सिस्टम की चुप्पी ने वर्दी पर दाग गहरा किया।”

खरगोन। विशाल भमोरिया | द इंडिया स्पीक्स

मध्यप्रदेश पुलिस पर एक बार फिर शर्मनाक दाग लगा है। खरगोन जिले की डीआरपी लाइन से ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे पुलिस सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अनुकंपा नियुक्ति पर कार्यरत आरक्षक राहुल चौहान ने रक्षित निरीक्षक सौरभ कुशवाह और उनकी पत्नी पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

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आरक्षक का आरोप है कि उसे नियमित ड्यूटी छोड़कर अफसर के बंगले पर “बच्चा संभालने और कुत्ते की देखरेख” जैसे निजी कामों में मजबूर किया गया। इतना ही नहीं, कुत्ता गायब होने पर बंगले के अंदर ले जाकर बेल्ट से बेरहमी से पीटा गया, गालियां दी गईं और जातिसूचक शब्द कहे गए।

पत्नी के सामने मारपीट, जातिसूचक गालियां

आरक्षक राहुल का आरोप है कि रक्षित निरीक्षक की पत्नी ने भी उसे जातिसूचक शब्द कहकर अपमानित किया—
“तु आदिवासी नीच जात का है, तुझे चप्पल से मारूंगी… कुत्ता ढूंढ, वरना तेरी नौकरी खा जाऊंगी।”

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आवेदक ने यह भी कहा कि उसके साथ उसकी पत्नी के सामने भी मारपीट की गई और धमकाया गया कि यदि शिकायत की तो बर्खास्तगी निश्चित है।

मेडिकल में सिर्फ शराब की जांच, चोटों का परीक्षण नहीं

घटना के बाद पीड़ित को जिला अस्पताल ले जाया गया। राहुल का कहना है कि वहां पर केवल अल्कोहल टेस्ट कराया गया, लेकिन शरीर पर पड़े घाव और चोटों का परीक्षण नहीं होने दिया गया। डॉक्टर से बात करने तक नहीं दी गई और मामला दबाने का प्रयास किया गया।

एसपी ऑफिस में भी दबाव – “माफीनामा लिख दो”

पीड़ित आरक्षक ने 26 अगस्त को पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर अपनी आपबीती सुनाई। आरोप है कि वहां भी उसे समझाया गया कि—
“आप शराब के नशे में थे, माफीनामा लिखकर माफी मांग लो, तब कोई कार्यवाही नहीं होगी।”

शिकायत पहुँची उच्च स्तर तक

आरक्षक राहुल ने मामले की लिखित शिकायत पुलिस अधीक्षक खरगोन, उप पुलिस महानिरीक्षक निमाड़, आईजी इंदौर, पुलिस मुख्यालय भोपाल, मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और अनुसूचित जनजाति आयोग नई दिल्ली तक भेजी है।

बड़े सवाल खड़े ?

क्या मध्यप्रदेश पुलिस की वर्दी अब अफसरों के निजी बंगले और कुत्ता-बच्चा सँभालने तक सीमित हो चुकी है?

अनुसूचित जनजाति वर्ग से आने वाले आरक्षक को सरेआम जातिसूचक शब्द कहे गए, फिर भी मामला दर्ज क्यों नहीं?

क्या पुलिस विभाग में ‘वर्दी के भीतर गुलामी’ और विरोध करने पर नौकरी जाने की धमकी आम हो चुकी है?

  • फिलहाल यह मामला पूरे जिले में चर्चा का विषय है। अब देखना होगा कि सरकार और पुलिस महकमा इस शर्मनाक आरोपों पर क्या कदम उठाता है, या फिर यह मामला भी ‘माफीनामा’ में ही दफ़न कर दिया जाएगा।
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