मनरेगा योजना से मौसंबी की खेती बन रही किसानों के लिए प्रेरणा
खरगोन। The India Speaks Desk
खरगोन जिले के रूपखेड़ा निवासी संदीप पटेल की जिंदगी मनरेगा योजना के तहत लगाए गए निजी फलोद्यान से बदल गई है। संदीप ने अपनी कृषि भूमि पर मौसंबी का बगीचा लगाकर न केवल परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारी बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है।
कपास और गेहूं से सीमित आय
पहले संदीप अपनी 0.4 हेक्टेयर कृषि भूमि पर कपास और गेहूं की खेती करते थे। लगभग 40 हजार रुपए की लागत से उन्हें सिर्फ 5 क्विंटल कपास और 12 क्विंटल गेहूं की उपज मिलती थी, जिससे कुल आय महज 80 हजार रुपए हो पाती थी।
मौसंबी बगीचे से बढ़ी आय
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अब इसी खेत में 1.25 लाख रुपए के निवेश से लगाए गए मौसंबी के बगीचे से उन्हें 200 क्विंटल उपज प्राप्त हो रही है। इससे 4 लाख रुपए की कुल आय और 2.75 लाख रुपए का शुद्ध लाभ हो रहा है। इस सफलता ने उनके परिवार का भविष्य सुरक्षित कर दिया है।
ग्राम पंचायत और मनरेगा का योगदान
ग्राम पंचायत रूपखेड़ा की ग्राम सभा में सर्वसम्मति से संदीप का चयन मनरेगा योजनांतर्गत निजी फलोद्यान के लिए किया गया था। वित्त वर्ष 2020–21 में इसकी तकनीकी और प्रशासकीय स्वीकृति जारी हुई थी। इस कार्य के लिए 1.63 लाख रुपए की लागत से 342 मानव दिवस का रोजगार भी क्षेत्रवासियों को मिला।
किसानों के लिए संदेश
संदीप की कहानी साबित करती है कि मनरेगा योजना ग्रामीण किसानों के लिए आय वृद्धि का बड़ा माध्यम बन सकती है। इस योजना के तहत फलदार पौधों की खेती किसानों को दीर्घकालिक लाभ और स्थायी समृद्धि प्रदान कर रही है।












