क्या सच में सुपारी और चुना दिमाग तक नशा पहुंचाने का गुप्त रास्ता हैं?
नई दिल्ली। डॉ. आकाश राठौड़ | The India Speaks
गुटखा सिर्फ तंबाकू का स्वाद नहीं है, यह एक ऐसा ज़हर है जो धीरे-धीरे दिमाग पर कब्ज़ा कर लेता है। कई लोग जानते हुए भी कि गुटखा कैंसर और अनगिनत बीमारियों का कारण है, उसे छोड़ नहीं पाते। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर ऐसा क्या है गुटखे में, जो इंसान को उसकी गिरफ्त से आज़ाद नहीं होने देता?
गुटखे की असली ताकत: निकोटिन का खेल
गुटखे का मुख्य नशे वाला तत्व है निकोटिन। यह दिमाग तक पहुंचते ही डोपामाइन नामक हार्मोन को सक्रिय करता है, जिससे व्यक्ति को तुरंत सुकून, ताजगी और हल्की खुशी महसूस होती है। यही वजह है कि शरीर इसे बार-बार मांगता है और लत गहरी होती जाती है।
सुपारी और चुना: नशे को तेज़ करने वाली जोड़ी
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गुटखे का खतरनाक पक्ष सिर्फ निकोटिन नहीं है, बल्कि इसमें मौजूद सुपारी और चुना हैं।
सुपारी – इसकी कठोरता मुंह के गाल और मसूड़ों पर छोटे-छोटे घाव (Micro Cuts) बना देती है।
चूना – यह क्षारीय होता है और मुंह की नाजुक परत को और ज्यादा संवेदनशील बना देता है।
जब ये दोनों मिलते हैं तो निकोटिन के लिए खून तक पहुंचने का शॉर्टकट तैयार हो जाता है। नतीजा, नशे की “किक” तुरंत दिमाग तक पहुंचती है।
क्यों छोड़ना मुश्किल हो जाता है?
निकोटिन की लत – यह सिगरेट और शराब से भी तेज़ पकड़ लेता है।
Withdrawal Symptoms – गुटखा छोड़ने पर चिड़चिड़ापन, सिर दर्द, नींद न आना और बेचैनी शुरू हो जाती है।
मानसिक जाल – लोग इसे थकान मिटाने, सिर दर्द ठीक करने या ताजगी पाने के बहाने खाने लगते हैं और धीरे-धीरे यह आदत मजबूरी में बदल जाती है।
छिपा हुआ खतरा: कट से कैंसर तक
बार-बार होने वाले ये घाव धीरे-धीरे ठीक नहीं होते, बल्कि वहां प्री-कैंसरस घाव बनने लगते हैं। यही आगे चलकर मुंह के कैंसर और गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं। यही कारण है कि डॉक्टर गुटखे को “धीमा ज़हर” कहते हैं।
निष्कर्ष
गुटखा केवल एक नशा नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक रूप से डिजाइन किया गया जाल है, जो इंसान को धीरे-धीरे अपनी गिरफ्त में कसता है। इसकी लत से बाहर निकलना मुश्किल है, लेकिन असंभव नहीं। जागरूकता, इच्छाशक्ति और मेडिकल मदद से ही इस खतरनाक चक्र को तोड़ा जा सकता है।
✍️ लेखक – डॉ. आकाश राठौड़











