कोलकाता।
भारत की समुद्री शक्ति को और अधिक मजबूत करते हुए 21 जुलाई 2025 को कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) द्वारा ASW SWC (Anti-Submarine Warfare Shallow Water Craft) परियोजना के तहत बनाए गए अंतिम युद्धपोत ‘यार्ड 3034 – अजय’ का भव्य जलावतरण किया गया।
यह पोत भारतीय नौसेना के लिए आठवां और इस परियोजना का अंतिम जहाज़ है, जिसे पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से विकसित किया गया है। ‘अजय’ की लॉन्चिंग के साथ ही नौसेना की पनडुब्बी रोधी शक्ति को नई धार मिल गई है।
🔷 कार्यक्रम की खास बातें:
मुख्य अतिथि: वाइस एडमिरल किरण देशमुख, चीफ ऑफ मटेरियल, भारतीय नौसेना
जलावतरण किया: उनकी पत्नी श्रीमती प्रिया देशमुख ने पारंपरिक रिवाजों के साथ
स्थान: कोलकाता का GRSE शिपयार्ड, जहां अब तक नौसेना के लिए कई अत्याधुनिक जहाज़ बनाए जा चुके हैं
📞 7772828778 | 7723024600
⚙️ युद्धपोत ‘अजय’ की खूबियां:
डिज़ाइन: स्वदेशी, GRSE द्वारा विकसित
लंबाई: 77 मीटर | गति: 25 समुद्री मील
हथियार: टॉरपीडो, ASW रॉकेट लॉन्चर, NSG-30 तोप, 12.7 मिमी रिमोट-नियंत्रित बंदूक
प्रणाली: हुल-माउंटेड सोनार और लो-फ्रीक्वेंसी वेरिएबल डेप्थ सोनार
प्रणोदन: Waterjet टेक्नोलॉजी
क्रू क्षमता: 57 नाविकों के लिए उपयुक्त
🛡️ रणनीतिक महत्व:
यह पोत उथले समुद्री इलाकों में पनडुब्बी की पहचान, निगरानी और निष्क्रिय करने में सक्षम है। साथ ही इसमें माइंस बिछाने, निगरानी, समुद्री कम्युनिकेशन और युद्ध के समय इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर जैसे अत्याधुनिक सामरिक फीचर्स भी जोड़े गए हैं। इस युद्धपोत की 80% से अधिक सामग्री भारत में निर्मित है — जो इसे ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ का बेहतरीन उदाहरण बनाता है।
📢 नौसेना की तैयारी को नई रफ्तार
GRSE द्वारा निर्धारित समय से पहले यह आठवां युद्धपोत तैयार करना भारत की तेजी से बदलती सामरिक क्षमताओं और निर्माण कौशल का परिचायक है। इससे यह साबित होता है कि भारत अब न केवल अपने लिए, बल्कि भविष्य में अन्य मित्र देशों के लिए भी युद्धपोत निर्माण की दिशा में अग्रणी भूमिका निभा सकता है।
द इंडिया स्पीक्स डेस्क
रक्षा | समुद्री सुरक्षा | आत्मनिर्भर भारत












