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भाजपा सरकार में ‘अव्यवस्थामान स्वास्थ्य योजना’, शव सौंपने तक के लिए बिल चुकाना ज़रूरी!

जयपुर। सत्यनारायण शर्मा | The India Speaks

राजस्थान की पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने जब राज्य में Right to Health (राइट टू हैल्थ) कानून लागू किया था, तब मकसद यह था कि कोई भी नागरिक पैसे के अभाव में इलाज से वंचित न रहे। लेकिन आज हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि निजी अस्पताल गरीब की लाश तक रोक रहे हैं।

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क्या है मामला?

सवाईमाधोपुर विधानसभा क्षेत्र के गांव दुब्बी के एक मरीज को जयपुर स्थित दुर्लभ जी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान मरीज की मौत हो गई। परिजनों ने शव मांगा, तो अस्पताल प्रशासन ने ₹1,78,000 का बकाया बिल चुकाने के बिना डेड बॉडी देने से साफ़ इनकार कर दिया।

जबकि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय में राइट टू हैल्थ योजना और चिरंजीवी योजना के तहत ₹25 लाख तक नि:शुल्क इलाज की गारंटी तय की गई थी।

कांग्रेस के वक़्त की योजनाएं, पर निगरानी लापता

अगर वर्तमान भाजपा सरकार कांग्रेस शासनकाल में लागू राइट टू हैल्थ कानून और मुख्यमंत्री चिरंजीवी योजना का सख्ती से क्रियान्वयन और मॉनिटरिंग करती, तो किसी निजी अस्पताल की यह जुर्रत नहीं होती कि वह शव रोक सके।

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“राजस्थान में स्वास्थ्य सेवाएं दम तोड़ चुकी हैं, और सरकार आंख मूंदे बैठी है।”
— स्थानीय नागरिकों का बयान

मंत्री किरोड़ी लाल मीणा को करना पड़ा हस्तक्षेप

चूंकि यह मामला कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के विधानसभा क्षेत्र से जुड़ा था, इसलिए मंत्री स्वयं दुर्लभ जी अस्पताल पहुंचे और हस्तक्षेप करने के बाद ही शव मृतक के परिजनों को सौंपा गया।

राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की भयावह स्थिति

स्वयं कैबिनेट मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने स्वीकार किया है कि राज्य में प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना और मुख्यमंत्री आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा योजना के अंतर्गत प्राइवेट अस्पतालों में इलाज नहीं हो रहा।

वर्तमान हालात में, भाजपा शासन में स्वास्थ्य सेवाओं की दुर्गति स्पष्ट दिख रही है —

गरीब मरीजों का इलाज ठप,

अस्पतालों में लूट और लापरवाही,

सरकारी बीमा योजनाएं निष्क्रिय,

और शव तक रोकने जैसी अमानवीय हरकतें जारी हैं।

जनता का सवाल — कहां गया राइट टू हैल्थ?

लोगों का कहना है कि जिस ‘स्वास्थ्य के अधिकार’ की बात कांग्रेस सरकार ने की थी, वह अब कागज़ों में कैद है। जनता पूछ रही है —

“जब इलाज़ का अधिकार कानून में दर्ज है, तो फिर शव क्यों रोका जा रहा है?”

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