📢 अपने क्षेत्र से जुड़ी भ्रष्टाचार की खबरे या विज्ञापन देने के लिए संपर्क करे
📞 7772828778 | 📩 Email: editor@theindiaspeaks.com

जंतर-मंतर पर 20 जून से जारी आंदोलन, तीसरे दिन भी भूख हड़ताल पर डटे सोनम वांगचुक; सरकार की चुप्पी पर गहराते सवाल

नई दिल्ली |The India Speaks Desk

दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जून से जारी आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक का अनशन मंगलवार को तीसरे दिन में प्रवेश कर गया है। इसके बावजूद केंद्र सरकार की ओर से अब तक न तो कोई सकारात्मक पहल दिखाई दी है और न ही आंदोलनकारियों से औपचारिक वार्ता की घोषणा हुई है।

कई दिनों से आंदोलन, लेकिन सरकार अब भी मौन

Cockroach Janata Party (CJP) के नेतृत्व में 20 जून से जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन जारी है। आंदोलन की मुख्य मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है। आरोप है कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में सामने आई कथित अनियमितताओं ने लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है और इसकी नैतिक जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। सोनम वांगचुक ने 28 जून से इस आंदोलन को समर्थन देते हुए अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की।

दूसरे दिन भी नहीं टूटी सरकार की चुप्पी

अनशन के दूसरे दिन जंतर-मंतर पर छात्रों, युवाओं, सामाजिक संगठनों और विभिन्न वर्गों के लोगों की मौजूदगी लगातार बढ़ती रही। सोनम वांगचुक ने कहा कि यदि न्याय की इस लड़ाई में उन्हें अपनी जान भी गंवानी पड़े तो वे पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने देशभर के नागरिकों से कम से कम एक दिन का सांकेतिक उपवास रखकर आंदोलन का समर्थन करने की अपील भी की।

आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे लोगों को आवश्यक बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं कराई जा रहीं। पोर्टेबल शौचालय उपलब्ध न कराने के आरोपों ने प्रशासन के रवैये पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आंदोलनकारी इसे शांतिपूर्ण प्रदर्शन के प्रति असंवेदनशील व्यवहार बता रहे हैं।

लोकतंत्र में संवाद की जगह चुप्पी क्यों?

देश में जब कोई आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा हो, हजारों लोग अपनी बात रखने के लिए लोकतांत्रिक मंच का सहारा ले रहे हों और एक प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता लगातार तीसरे दिन भूख हड़ताल पर बैठा हो, तब सरकार की ओर से संवाद का अभाव कई सवाल खड़े करता है।

विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि किसी भी लोकतांत्रिक सरकार की पहली जिम्मेदारी संवाद स्थापित करना होती है, न कि आंदोलन को लंबा खिंचने देना। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक आंदोलन की मांगों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

तीसरे दिन बढ़ी स्वास्थ्य को लेकर चिंता

डॉक्टरों के अनुसार लगातार उपवास शरीर पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। ऐसे में जैसे-जैसे अनशन लंबा खिंच रहा है, समर्थकों की चिंता भी बढ़ रही है। जंतर-मंतर पर आज भी बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं और आंदोलन को अपना समर्थन दे रहे हैं।

अब सवाल केवल सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य का नहीं, बल्कि सरकार की जवाबदेही का भी है। क्या सरकार आंदोलनकारियों से बातचीत कर कोई समाधान निकालेगी, या फिर यह आंदोलन और अधिक व्यापक रूप लेगा? यदि समय रहते संवाद नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में यह मुद्दा देशव्यापी जनआंदोलन का स्वरूप भी ले सकता है।

ASUS Vivobook Laptop Buy Now

Leave a Reply

You missed

📢 The India Speaks में रिपोर्टर भर्ती शुरू!

क्या आपके पास खबरों की समझ है? क्या आप अपने क्षेत्र की सच्चाई सामने लाना चाहते हैं?

🔍 The India Speaks अपने नेटवर्क के विस्तार के लिए स्थानीय रिपोर्टर नियुक्त कर रहा है।

✍️ ज़िम्मेदारियां:

✅ पात्रता:

💼 लाभ:

📲 आवेदन करें:

📧 ईमेल: editor@theindiaspeaks.com
📞 मोबाइल: 7772828778

⚠️ यह भर्ती केवल गंभीर और ज़िम्मेदार अभ्यर्थियों के लिए है। स्थान सीमित हैं।