गरीबी, बीमारी और बेबसी के बीच सरकारी योजनाएं बनीं उम्मीद की किरण
खरगोन | The India Speaks
खरगोन जिले की भगवानपुरा तहसील के सुदूरवर्ती गांव देजला में जन्मा कृष्णा बचपन से ही हृदय की गंभीर बीमारी से जूझ रहा था। मामूली मेहनत के बाद थक जाना, चेहरे का नीला पड़ जाना और सांस फूलना उसके जीवन का हिस्सा बन चुका था। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार इलाज के लिए दर-दर भटकता रहा—कभी अस्पताल तो कभी मंदिर, पर राहत कहीं से नहीं मिली।
परंतु साल 2020 में गांव के शासकीय विद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के तहत हुई स्क्रीनिंग ने इस परिवार की तक़दीर बदल दी।
सरकारी डॉक्टरों ने पहचानी गंभीर बीमारी, बना जीवन रक्षा का रास्ता


डॉ. किशोर राठौर और डॉ. मयूरी गुप्ता के नेतृत्व में कार्यरत RBSK टीम ने कृष्णा की बीमारी को समय रहते पहचाना और तत्काल जिला अस्पताल खरगोन रेफर किया। इसके बाद इलाज की जो प्रक्रिया शुरू हुई, वह न केवल चिकित्सा सहायता का प्रमाण बनी, बल्कि सरकारी योजनाओं की कार्यकुशलता और मानवीय संवेदना की मिसाल भी बनी।
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जिला अस्पताल से इंदौर और फिर वहां से DEIC मैनेजर विनोद पंवार की मदद से कृष्णा को मुंबई के SRCC चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल (नारायणा अस्पताल) रेफर किया गया। जांच में पता चला कि कृष्णा को जन्मजात हृदय विकृति है, जो समय रहते इलाज न मिलने पर जानलेवा हो सकती थी।
मुंबई में दो सफल सर्जरी, मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना और आयुष्मान योजना बनीं आधार
24 अक्टूबर 2020 को मुख्यमंत्री बाल हृदय उपचार योजना के अंतर्गत पहला ऑपरेशन (Right Bidirectional Glenn, MPA Banding, Left SVC Collateral Ligation) सफलतापूर्वक हुआ। इसके बाद 4 अगस्त 2025 को आयुष्मान भारत योजना के तहत दूसरी सर्जरी (TCPC – Complete Fontan) भी सफल रही। सर्जरी टीम में डॉ. प्रदीप कौशिक, डॉ. कृष्णेंदु मैती और डॉ. सुप्रितम सेन शामिल रहे।
परिवार की भावुक प्रतिक्रिया, डॉक्टरों और योजनाओं का जताया आभार
कृष्णा के पिता मुकेश नार्वे भावुक स्वर में कहते हैं—
“हमारी आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि बेटे का इलाज सपना लगता था। पर डॉक्टरों, योजनाओं और स्वास्थ्य विभाग ने जो किया, वह हमारे लिए चमत्कार से कम नहीं है। आज कृष्णा हमारे सामने हंस रहा है, यही सबसे बड़ी राहत है।”
प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मोहन सिंह सिसोदिया ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की जनकल्याणकारी सोच और कलेक्टर सुश्री भव्या मित्तल के मार्गदर्शन में जिले में यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई भी पात्र व्यक्ति योजना से वंचित न रहे।
वहीं नोडल अधिकारी डॉ. संजय भट्ट ने कहा—
“RBSK टीमों के माध्यम से हम जन्मजात विकृति वाले बच्चों की पहचान कर उन्हें समय पर इलाज दिला रहे हैं। हमारा उद्देश्य है कि कोई बच्चा केवल पैसों के अभाव में अपना बचपन न गंवाए।”












