जांच में दोष सिद्ध, चिकित्सक व नर्स निलंबित
खरगोन। The India Speaks Desk
स्वास्थ्य सेवाओं में गंभीर लापरवाही के एक चौंकाने वाले मामले में जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए त्वरित कार्रवाई की है। दैनिक भास्कर में प्रकाशित खबर के संज्ञान में आने के बाद प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच कराई और दोषियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की।
प्रसूता के ऑपरेशन में गंभीर चूक
प्राप्त जानकारी के अनुसार, विकासखंड भीकनगांव के ग्राम सेल्दा निवासी प्रसूता श्रीमती मनीषा (पति श्री विनोद घोरमाडे) का 17 मार्च 2026 को जिला अस्पताल खरगोन में सिजेरियन ऑपरेशन किया गया था। हैरानी की बात यह रही कि ऑपरेशन के करीब 14 दिन बाद यह खुलासा हुआ कि सर्जरी के दौरान उपयोग किया गया सर्जिकल नेपकिन प्रसूता के पेट में ही छूट गया था।
कलेक्टर के निर्देश पर तत्काल जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर सुश्री भव्या मित्तल के निर्देशानुसार मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा तत्काल जांच दल गठित किया गया। जांच दल ने विस्तृत पड़ताल के बाद जिला अस्पताल में पदस्थ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मोहित गुप्ता और नर्सिंग ऑफिसर श्रीमती दिव्या वर्मा को दोषी पाया।
दोषियों पर गिरी गाज, निलंबन की कार्रवाई
जांच रिपोर्ट के आधार पर आयुक्त, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग, भोपाल द्वारा डॉ. मोहित गुप्ता को निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय क्षेत्रीय संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं, इंदौर संभाग निर्धारित किया गया है।
वहीं, क्षेत्रीय संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं, इंदौर संभाग द्वारा नर्सिंग ऑफिसर श्रीमती दिव्या वर्मा को भी निलंबित करते हुए उनका मुख्यालय मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला बड़वानी निर्धारित किया गया है।
प्रशासन का स्पष्ट संदेश
“स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं है। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी।”
निलंबित अधिकारी एवं कर्मचारी को नियमानुसार निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता रहेगी। प्रशासन ने इस कार्रवाई के जरिए साफ संकेत दिया है कि मरीजों की सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।











