महीनों तक सड़क किनारे खड़ा रहा वाहन, आग लगने के बाद सामने आई सफाई व्यवस्था और खर्च की परतें
बड़वाह| The India Speaks
बड़वाह कस्बा पंचायत में विधायक निधि से प्राप्त लगभग 10 लाख रुपये मूल्य का कचरा वाहन अज्ञात कारणों से आग की चपेट में आकर पूरी तरह जलकर खाक हो गया। लेकिन यह मामला केवल एक वाहन में आग लगने तक सीमित नहीं है। घटना के बाद सामने आए दस्तावेज, अधिकारियों के बयान और स्थानीय लोगों के आरोप अब पूरे कचरा प्रबंधन तंत्र और सरकारी धन के उपयोग पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार कचरा वाहन पिछले दो से तीन माह से दशहरा मैदान क्षेत्र में सड़क किनारे खड़ा था। वाहन में कचरा भी भरा हुआ था और उसकी नियमित निगरानी या सुरक्षा के कोई विशेष इंतजाम नजर नहीं आ रहे थे। आखिरकार वाहन आग की चपेट में आ गया और देखते ही देखते पूरी तरह जल गया।
मरम्मत पर 3 लाख खर्च, फिर भी सड़क पर खड़ा रहा वाहन


प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार 03 फरवरी 2025 से 06 मार्च 2026 के बीच वाहन की मरम्मत और रखरखाव पर करीब 3 लाख रुपये खर्च किए गए। उपलब्ध बिलों के मुताबिक बड़वाह स्थित A One ऑटोमोबाइल को मरम्मत कार्य के लिए ₹2,23,018 का भुगतान किया गया, जबकि लगभग ₹78 हजार रुपये मैकेनिक मजदूरी पर खर्च दर्शाए गए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब एक वर्ष के भीतर लगभग 3 लाख रुपये मरम्मत और रखरखाव पर खर्च किए गए, तो वाहन लगातार खराब क्यों बना रहा? यदि वाहन उपयोग योग्य नहीं था तो उस पर बार-बार खर्च क्यों किया गया? और यदि खर्च के बाद भी वाहन चालू नहीं हो पाया तो उन कार्यों का वास्तविक परिणाम क्या रहा?


सचिव बोले- मार्च में पदभार संभाला, पूरी जानकारी नहीं
कस्बा पंचायत सचिव श्री राजाराम यादव ने बताया कि उन्होंने 15 मार्च 2026 को पदभार ग्रहण किया है, इसलिए वाहन के पुराने रिकॉर्ड और पूर्व की स्थिति की पूरी जानकारी उन्हें नहीं है।
उन्होंने बताया कि वाहन खराब अवस्था में था और उसकी बॉडी भी क्षतिग्रस्त हो चुकी थी, जिसके कारण उसका उपयोग नहीं किया जा रहा था। सचिव के अनुसार वाहन करीब एक माह से सड़क किनारे खड़ा था। आग लगने के कारणों की जांच की जाएगी।
फिर कचरा प्रबंधन कैसे चल रहा था?
मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू तब सामने आया जब सचिव ने स्वीकार किया कि वाहन खराब होने के कारण नियमित कचरा संग्रहण प्रभावित था। उन्होंने बताया कि फिलहाल रहवासी अपने स्तर पर ही कचरे का प्रबंधन और संग्रहण कर रहे थे।
यह स्वीकारोक्ति कई नए सवाल खड़े करती है। यदि कचरा वाहन लंबे समय से बंद था तो घर-घर कचरा संग्रहण की वैकल्पिक व्यवस्था क्या थी? क्या पंचायत ने किसी अन्य वाहन की व्यवस्था की थी? यदि नहीं, तो स्वच्छता व्यवस्था किस आधार पर संचालित हो रही थी?
सड़क किनारे क्यों छोड़ दी गई सार्वजनिक संपत्ति?


स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि वाहन खराब था तो उसे पंचायत परिसर, वर्कशॉप या किसी सुरक्षित स्थान पर रखा जाना चाहिए था। सार्वजनिक धन से खरीदे गए वाहन को लंबे समय तक सड़क किनारे छोड़ना भी सवालों के घेरे में है।
घटना के बाद लोगों के बीच यह चर्चा है कि आखिर लाखों रुपये की सरकारी संपत्ति की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी और उसे खुले में क्यों छोड़ा गया।
आग ने खोल दी कई परतें
वाहन में लगी आग ने केवल एक सरकारी वाहन को नहीं जलाया, बल्कि कई ऐसे सवाल भी खड़े कर दिए हैं जिनके जवाब अब तक नहीं मिले हैं।
क्या मरम्मत पर खर्च हुए 3 लाख रुपये का तकनीकी ऑडिट होगा?
वाहन कब से खराब था?
मरम्मत के बावजूद वह चालू क्यों नहीं हो सका?
उसे सुरक्षित स्थान पर क्यों नहीं रखा गया?
और आखिर इस पूरे मामले में जवाबदेही किसकी तय होगी?
जांच और जवाबदेही की मांग
स्थानीय नागरिक अब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह केवल आगजनी की घटना नहीं, बल्कि सार्वजनिक धन, संसाधनों के रखरखाव और स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही से जुड़ा मामला है।
फिलहाल कचरा वाहन राख में तब्दील हो चुका है, लेकिन उसके साथ जुड़े सवाल अब भी धधक रहे हैं।












