ओंकारेश्वर | The India Speaks Desk
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में अधिकृत पंडितों के प्रवेश पर रोक लगाए जाने के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। बुधवार सुबह से मंदिर की ओर जाने वाले टी-पॉइंट से पंडितों का प्रवेश रोक दिए जाने पर पुजारियों ने प्रशासन के निर्णय का विरोध करते हुए इसे उनकी धार्मिक परंपरा और आजीविका पर असर डालने वाला फैसला बताया है।
एसडीएम के मौखिक निर्देश के बाद बदली व्यवस्था
जानकारी के अनुसार, मंगलवार को पंडित दिनेश शर्मा एक 86 वर्षीय बुजुर्ग श्रद्धालु एवं अन्य यजमानों के साथ ऑनलाइन टिकट के माध्यम से मंदिर दर्शन के लिए गए थे। बताया जाता है कि इस दौरान एसडीएम पुनासा पंकज वर्मा ने सीसीटीवी फुटेज में पंडित दिनेश शर्मा को श्रद्धालुओं के साथ मंदिर में प्रवेश करते देखा। प्रशासन को आशंका हुई कि श्रद्धालुओं को अलग से राशि लेकर मंदिर के अंदर ले जाया जा रहा है।
इसके बाद एसडीएम द्वारा कलेक्टर को मामले की जानकारी दी गई। आरोप है कि एसडीएम के मौखिक निर्देश पर सुरक्षा कंपनी के इंचार्ज तिलोक त्यागी ने सुरक्षा कर्मियों के ग्रुप में संदेश जारी कर बुधवार सुबह से टी-पॉइंट से मंदिर की ओर पंडितों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए। साथ ही आदेश का उल्लंघन करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई और नौकरी जाने तक की चेतावनी भी दी गई।
पंडितों ने रखीं तीन प्रमुख मांगें
पंडित राधे तिवारी और नगर परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष पंडित नवल किशोर शर्मा ने बताया कि प्रशासन की इस व्यवस्था से अधिकृत पंडित अपने यजमानों के साथ मंदिर में प्रवेश नहीं कर पा रहे हैं।
पंडितों ने प्रशासन के समक्ष तीन प्रमुख मांगें रखी हैं—
- अधिकृत पंडितों को मंदिर में निर्बाध प्रवेश दिया जाए।
- यजमानों के साथ जलाभिषेक कराने की पूर्व व्यवस्था बहाल की जाए।
- अभिषेक हॉल में बैठकर श्रद्धालुओं का विधिवत पूजन-अर्चन कराने की अनुमति फिर से दी जाए।
कलेक्टर ने समाधान का दिया आश्वासन
पूरे मामले की जानकारी पंडितों ने फोन पर खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता को भी दी। पंडितों के अनुसार, कलेक्टर ने समस्या के शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया है।
पुजारियों का कहना है कि यदि अधिकृत पंडितों को ही मंदिर में प्रवेश नहीं मिलेगा तो श्रद्धालुओं के पारंपरिक पूजन-अर्चन की व्यवस्था प्रभावित होगी। वहीं, स्थानीय लोगों का भी मानना है कि यह मामला पंडितों की आजीविका और धार्मिक परंपराओं से जुड़ा है, इसलिए प्रशासन को इस संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
(यदि प्रशासन या संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होता है तो उसे भी समाचार में प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)











