खरगोन /बड़वाह| द इंडिया स्पीक्स
बड़वाह। खरगोन जिले की बड़वाह तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत रमाणा के ग्राम चिचला में करीब 4 हेक्टेयर शासकीय चरनोई भूमि को कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्लांट के लिए दिए जाने की तैयारी को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि यह गांव की एकमात्र प्रमुख चरनोई भूमि है, जहां पूरे गांव के गाय-भैंस समेत अन्य मवेशी चरते हैं। जमीन प्लांट के लिए दिए जाने की स्थिति में पशुपालन और दुग्ध व्यवसाय से जुड़े परिवारों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।
ग्रामीणों का दावा- 80 प्रतिशत परिवार दुग्ध व्यवसाय से जुड़े
ग्रामीणों ने प्रशासन को दिए शिकायत पत्र में बताया है कि गांव के करीब 80 प्रतिशत किसान और परिवार दुग्ध व्यवसाय से जुड़े हैं। पशुपालन उनकी आय का महत्वपूर्ण साधन है। ऐसे में चरनोई भूमि का उपयोग दूसरे उद्देश्य के लिए किए जाने से मवेशियों के लिए चराई की व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका ग्रामीणों ने जताई है।
ग्रामीणों के अनुसार सर्वे क्रमांक 55/1, 43 और 49 में दर्ज कुल 4.928 हेक्टेयर भूमि में से करीब 4 हेक्टेयर भूमि को CBG प्लांट के लिए दिए जाने की प्रक्रिया चल रही है। ग्रामीणों का सवाल है कि यदि यह जमीन प्लांट के लिए चली गई तो गांव के मवेशी कहां चरेंगे?
श्मशान, तालाब और धार्मिक परंपरा से भी जुड़ी जमीन
ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित क्षेत्र केवल चराई के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि इससे गांव की कई सार्वजनिक सुविधाएं भी जुड़ी हुई हैं। ग्रामीणों के अनुसार इसी शासकीय भूमि क्षेत्र में चिचला का श्मशान घाट और मवेशियों के पानी पीने का तालाब स्थित है।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि इसी तालाब में प्रतिवर्ष गणगौर माता का विसर्जन किया जाता है। इसके अलावा क्षेत्र में पहाड़ी नाला और उद्यानिकी विभाग की पुरानी नर्सरी भी मौजूद होने की बात ग्रामीणों ने शिकायत में कही है।
ग्रामीणों ने जताई दुर्गंध और प्रदूषण की आशंका
गांव के नजदीक CBG प्लांट स्थापित किए जाने को लेकर ग्रामीणों ने दुर्गंध और अन्य संभावित पर्यावरणीय परेशानियों की आशंका जताई है। उनका कहना है कि प्लांट बनने के बाद आसपास के रहवासी क्षेत्र पर इसका प्रभाव पड़ सकता है।
हालांकि इन पर्यावरणीय आशंकाओं की वास्तविक स्थिति परियोजना की तकनीकी जानकारी, पर्यावरणीय स्वीकृतियों और संबंधित विभागों की रिपोर्ट के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी।
ग्राम पंचायत ने भी आपत्ति दर्ज कराने का किया दावा
ग्रामीणों के शिकायत पत्र के अनुसार ग्राम पंचायत रमाणा ने 28 जुलाई 2025 को विशेष ग्राम सभा आयोजित कर प्रस्ताव क्रमांक 01 के माध्यम से संबंधित भूमि के आवंटन का विरोध करते हुए आपत्ति दर्ज की थी।
ग्रामीणों का आरोप है कि आपत्ति के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर जमीन की नपती की गई और मौके पर खूंटे गाड़े गए।
8 अप्रैल 2026 को नपती और खूंटे गाड़ने का आरोप
ग्रामीणों ने अपने शिकायत पत्र में आरोप लगाया है कि 8 अप्रैल 2026 को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), तहसीलदार बड़वाह, राजस्व निरीक्षक और पटवारियों का दल मौके पर पहुंचा। ग्रामीणों का दावा है कि विरोध के बावजूद भूमि की नापती की गई और वहां खूंटे गाड़े गए।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि पहले से आपत्तियां दर्ज हैं तो अंतिम निर्णय से पहले उनकी आपत्तियों और ग्राम पंचायत के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
उद्योग विभाग की कथित रिपोर्ट का भी शिकायत पत्र में उल्लेख
इस मामले में ग्रामीणों ने इंदौर संभाग कमिश्नर को दिए शिकायत पत्र में एक कथित विभागीय रिपोर्ट का भी उल्लेख किया है। शिकायत पत्र में दावा किया गया है कि जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र, खरगोन के महाप्रबंधक ने पत्र क्रमांक जिल्याउके.-ख/अधोविक/2025–26591, दिनांक 23 फरवरी 2026 के माध्यम से उक्त भूमि को उद्योग स्थापना के अनुकूल नहीं बताया था।
द इंडिया स्पीक्स के पास फिलहाल उक्त विभागीय पत्र की मूल प्रति उपलब्ध नहीं है। इसलिए उद्योग विभाग की कथित रिपोर्ट के निष्कर्ष को स्वतंत्र रूप से सत्यापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा रहा है। यह जानकारी ग्रामीणों द्वारा अपने शिकायत पत्र में किए गए उल्लेख के आधार पर है।
ग्रामीणों ने कमिश्नर से लगाई गुहार
ग्रामीणों एवं ग्राम पंचायत के प्रतिनिधियों ने प्रशासन से मांग की है कि जब तक ग्रामीणों और पंचायत को उनकी आपत्तियों पर विधिवत सुनवाई का अवसर नहीं दिया जाता, तब तक संबंधित भूमि के आवंटन की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव की चरनोई भूमि को सुरक्षित रखा जाना चाहिए, ताकि पशुपालन और दुग्ध व्यवसाय पर निर्भर परिवारों की आजीविका प्रभावित न हो।
अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन ग्रामीणों की आपत्तियों और ग्राम पंचायत के प्रस्ताव पर क्या निर्णय लेता है और प्रस्तावित CBG प्लांट के लिए संबंधित भूमि का अंतिम रूप से आवंटन किस आधार पर किया जाता है।












