- नियम ताक पर: जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) की धज्जियां उड़ाकर खुले ट्रकों में ले जाया जा रहा बदबूदार गीला वेस्ट (DWGS)।
- जांच के नाम पर खेल: शिकायत होते ही गाड़ियां छुपा देता है प्रबंधन, अधिकारी आते हैं तो प्लांट बंद होने का मिलता है बहाना।
- बड़ा स्वास्थ्य संकट: गीले कचरे में पनप रहा खतरनाक ‘एफ्लाटॉक्सिन बी1’ फंगस, बच्चों और आम जनता तक दूध के जरिए पहुँचने की आशंका।
बड़वाह/खरगोन बड़वाह स्थित शराब निर्माता कंपनी ‘एसोसिएट अल्कोहल्स एंड ब्रीवरीज लिमिटेड’ (AABL) इन दिनों क्षेत्र के पर्यावरण, मवेशियों और आम जनता की सेहत के साथ एक बड़ा और जानबूझकर खिलवाड़ कर रही है। नियमों के मुताबिक, शराब (एथेनॉल) बनाने के बाद अनाज के बचे हुए अवशेषों को पूरी तरह सुखाकर पाउडर (DDGS) के रूप में बेचा जाना अनिवार्य है। लेकिन कंपनी बिजली और कोयले का खर्च बचाने के लिए भारी नमी और एसिडिक लिक्विड से युक्त गीला कचरा (DWGS) ही खुले ट्रकों में भरकर खुलेआम परिवहन कर रही है।
सड़कों पर रिसता बदबूदार तरल, नियमों की सरेआम धज्जियां
इस गीले वेस्ट को ले जाने वाले ट्रकों से बदबूदार और जहरीला तरल पदार्थ लगातार सड़कों और नालियों में रिस रहा है। यह जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) के केंद्रीय नियमों का सीधा और खुला उल्लंघन है। इस एसिडिक लिक्विड से जहां एक तरफ जमीन और भूमिगत जल प्रदूषित हो रहा है, वहीं दूसरी ओर राहगीरों का सड़कों से गुजरना दूभर हो गया है।
एफ्लाटॉक्सिन बी1′ का खतरा: पशुओं से लेकर इंसानों तक पहुँच रहा जहर
वैज्ञानिकों और डेयरी विशेषज्ञों के अनुसार, अत्यधिक नमी वाले इस अनाज के मलबे (DWGS) को जब खुले ट्रकों में हवा और धूप के संपर्क में ले जाया जाता है, तो 24 घंटे के भीतर इसमें Aspergillus नाम का बेहद खतरनाक फंगस पनप जाता है। यह फंगस ‘एफ्लाटॉक्सिन बी1’ (Aflatoxin B1) नामक जानलेवा विष पैदा करता है, जो दुनिया के सबसे घातक प्राकृतिक कैंसरकारकों में से एक है।
यही दूषित और सड़ा हुआ अपशिष्ट आसपास के क्षेत्रों में पशुपालकों को सस्ते दामों पर चारे के रूप में परोसा जा रहा है। जब दुधारू पशु इसे खाते हैं, तो यह जहर उनके लीवर से होते हुए दूध में ‘एफ्लाटॉक्सिन एम1’ (AFM1) के रूप में बदल जाता है। इसी जहरीले दूध का सेवन मासूम बच्चे और आम जनता कर रहे हैं, जो भविष्य में लीवर कैंसर और पेट की गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।
आखिर अधिकारी आने पर क्यों ‘गायब’ हो जाती हैं गाड़ियां?
स्थानीय जागरूक नागरिकों का आरोप है कि इस अवैध परिवहन की शिकायत जब भी मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) के क्षेत्रीय अधिकारियों से की जाती है, तो जांच टीम के पहुँचने से ठीक पहले प्लांट प्रबंधन को भनक लग जाती है। आनन-फानन में कंपनी खुले ट्रकों और गाड़ियों को छुपा देती है और प्लांट को बंद दिखा देती है। अधिकारियों के लौटते ही यह अवैध खेल फिर से शुरू हो जाता है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और NGT के रडार पर कंपनी!
जागरूक नागरिकों ने अब इस पूरे मामले की अकाट्य साक्ष्यों (GPS लोकेशन, तारीख और समय वाले वीडियो) के साथ सीधे MPPCB के भोपाल मुख्यालय (सदस्य सचिव), केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) में शिकायत दर्ज करने की तैयारी कर ली है।
मांग की जा रही है कि स्थानीय अधिकारियों के बजाय भोपाल की स्वतंत्र सतर्कता (Vigilance) टीम द्वारा कंपनी का रात्रिकालीन औचक निरीक्षण किया जाए और कंपनी के बिजली बिलों व स्टॉक रजिस्टर की फॉरेंसिक जांच हो, ताकि अधिकारियों के आते ही प्लांट बंद करने की इनकी चालाकी पकड़ी जा सके। यदि समय रहते इस गंभीर लापरवाही पर रोक नहीं लगाई गई, तो क्षेत्र में एक बड़ी जनहानि और स्वास्थ्य आपातकाल जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।












