बड़वाह। लोकेश कोचले। The India Speaks Desk।
बड़वाह पुलिस अवैध कच्ची महुआ शराब के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है। हालिया कार्रवाई में पुलिस ने 65 लीटर कच्ची महुआ शराब के साथ दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई कानून व्यवस्था के लिहाज से जरूरी है, लेकिन इसी के साथ अब एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो रहा है—क्या अवैध शराब के कारोबार पर कार्रवाई सिर्फ कच्ची महुआ शराब तक सीमित रहेगी या शहर में कथित तौर पर खुलेआम शराब बेचने वाले ढाबों तक भी पुलिस और आबकारी विभाग की कार्रवाई पहुंचेगी?
ढाबों पर खुलेआम शराब बिक्री के आरोप, कार्रवाई कब?
बड़वाह शहर और आसपास के क्षेत्र में कुछ ढाबों पर शराब परोसे और बेचे जाने के आरोप लंबे समय से सामने आते रहे हैं। यदि इन स्थानों पर बिना वैध अनुमति शराब की बिक्री या परोसने का काम किया जा रहा है तो यह भी जांच और कार्रवाई का स्पष्ट विषय है।
ऐसे में सवाल यह है कि पुलिस और आबकारी विभाग इन ढाबों की जांच कब करेगा? क्या विभाग यह पता लगाने के लिए विशेष अभियान चलाएगा कि किन ढाबों पर नियमों का उल्लंघन हो रहा है?
शराब ठेकों पर MRP से अधिक वसूली के दावे भी सामने
मामला सिर्फ ढाबों तक सीमित नहीं है। बड़वाह में शराब दुकानों पर बीयर की बोतल और कैन पर अंकित MRP से 10 रुपये अधिक वसूले जाने के कई दावे भी सामने आ चुके हैं।
The India Speaks ने इससे पहले भी शराब दुकानों पर MRP से अधिक वसूली के मामले को प्रमुखता से उठाया था। इसके बावजूद यदि उपभोक्ताओं की ओर से फिर वही शिकायतें सामने आ रही हैं तो आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि MRP से अधिक वसूली के प्रत्येक मामले की पुष्टि वास्तविक बिल, उत्पाद पर अंकित MRP और वसूली गई राशि की जांच के बाद ही हो सकती है।
गरीब पर कार्रवाई और बड़े कारोबार पर नरमी क्यों?
कच्ची महुआ शराब के मामले में पुलिस की कार्रवाई लगातार दिखाई दे रही है। लेकिन दूसरी तरफ यदि शहर के ढाबों पर अवैध रूप से शराब बेचे जाने या शराब दुकानों पर MRP से अधिक राशि वसूले जाने की शिकायतें सही हैं, तो वहां कार्रवाई क्यों दिखाई नहीं देती?
सवाल किसी व्यक्ति या वर्ग के पक्ष में खड़े होने का नहीं है। सवाल यह है कि कानून सभी के लिए बराबर है तो कार्रवाई भी सभी के खिलाफ समान रूप से क्यों नहीं होनी चाहिए?
यदि कोई गरीब व्यक्ति अवैध शराब के साथ पकड़ा जाता है तो उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई होती है। फिर लाइसेंसी शराब कारोबार से जुड़े स्थानों पर नियमों के उल्लंघन की शिकायतों की जांच में वही तत्परता क्यों नजर नहीं आती?
आबकारी विभाग की भूमिका पर उठ रहे गंभीर सवाल
अवैध शराब की बिक्री और MRP से अधिक वसूली पर निगरानी की जिम्मेदारी संबंधित विभागों की है। ऐसे में अब आबकारी विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि बड़वाह शहर के ढाबों पर शराब की कथित अवैध बिक्री और शराब दुकानों पर MRP से अधिक वसूली की शिकायतों को लेकर अब तक क्या कार्रवाई की गई है।
क्या विभाग ढाबों की जांच करेगा?
क्या शराब दुकानों पर MRP की जांच के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा?
और यदि शिकायतें सही पाई जाती हैं तो क्या संबंधित लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई होगी?
The India Speaks का सीधा सवाल
बड़वाह पुलिस यदि अवैध शराब के खिलाफ अभियान चला रही है तो उसका स्वागत किया जाना चाहिए। लेकिन कार्रवाई का दायरा भी समान होना चाहिए।
कच्ची महुआ शराब बनाने या उसका परिवहन करने वालों पर कार्रवाई के साथ-साथ यदि शहर के ढाबों पर खुलेआम अवैध शराब बिक्री के आरोप हैं और शराब दुकानों पर MRP से अधिक वसूली के दावे सामने आ रहे हैं, तो इन मामलों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
अब देखना यह है कि पुलिस और आबकारी विभाग इन सवालों को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई करता है या अवैध शराब के खिलाफ अभियान केवल छोटे स्तर पर शराब रखने और बेचने वालों तक ही सीमित रहता है।












