भोपाल | The India Speaks Desk
मध्यप्रदेश सरकार ने प्रशासन और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से एक नई पहल ‘जन विश्वास का सफर’ शुरू करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में तय किया गया कि अब प्रत्येक शुक्रवार मंत्रालय, जिला और संभाग स्तर पर नियमित बड़ी समीक्षा बैठकों के स्थान पर मंत्री, जनप्रतिनिधि और अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में पहुंचकर आम नागरिकों से सीधे संवाद करेंगे।
हालांकि इस घोषणा के साथ ही कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं। प्रदेश में पहले से ही मंगलवार को विभिन्न विभागों द्वारा जनसमस्याओं के समाधान के लिए बैठकें आयोजित की जाती रही हैं। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नया अभियान केवल एक औपचारिक कार्यक्रम बनकर रह जाएगा या वास्तव में जनता की समस्याओं के समाधान और सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत सामने लाने का माध्यम बनेगा।
क्या होगा ‘जन विश्वास का सफर’ का उद्देश्य?
सरकार के अनुसार इस अभियान का मुख्य उद्देश्य जन शिकायतों का त्वरित निराकरण करना, शासन और जनता के बीच विश्वास को मजबूत बनाना तथा विभिन्न विभागों की योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करना है। अभियान के दौरान अधिकारी ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुनेंगे। जहां संभव होगा, मौके पर ही समाधान किया जाएगा, जबकि शेष मामलों के समयबद्ध निराकरण की व्यवस्था की जाएगी।
योजनाओं की वास्तविक स्थिति भी होगी स्पष्ट
यदि अभियान ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ संचालित होता है तो इससे यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं वास्तव में पात्र हितग्राहियों तक पहुंच रही हैं या नहीं। साथ ही यह भी सामने आएगा कि विभिन्न योजनाओं के लिए आवंटित सरकारी राशि का कितना प्रभावी उपयोग हुआ है और कहां सुधार की आवश्यकता है।
भ्रष्टाचार पर होगी कार्रवाई, सादगी रहेगा अभियान का मूल मंत्र
सरकार ने स्पष्ट किया है कि अभियान के दौरान यदि किसी स्तर पर भ्रष्टाचार, अनियमितता या लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अभियान का मूल मंत्र संवाद, समाधान, संवेदनशीलता और सादगी रहेगा। इसके लिए किसी अतिरिक्त बजट का प्रावधान नहीं किया गया है तथा अनावश्यक तामझाम से बचने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे इस अभियान के दौरान अपनी समस्याएं, शिकायतें और सुझाव सीधे अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों के सामने रखें। अब निगाहें इस बात पर होंगी कि ‘जन विश्वास का सफर’ वास्तव में जनता का विश्वास जीत पाता है या यह भी पूर्व की कई प्रशासनिक पहलों की तरह केवल एक औपचारिक अभियान बनकर रह जाता है।












