पुराने लिखित आश्वासन की बड़ी फ्रेम लगाकर धरने पर बैठे रहवासी, सवाल- आश्वासन के बाद भी सड़क-नाली क्यों नहीं बनी?
बड़वाह। द इंडिया स्पीक्स
शहर की कॉलोनियों में रहने वाले परिवारों को अगर 35 साल बाद भी सड़क और नाली जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए धरने पर बैठना पड़े, तो यह सिर्फ एक कॉलोनी की समस्या नहीं, बल्कि व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। बड़वाह की रेवा नगर कॉलोनी, शर्मा कॉलोनी सहित आसपास के क्षेत्रों के रहवासी पिछले 12 दिनों से धरने पर बैठे हैं। बारिश के दिनों में कीचड़, जलभराव और गंदगी के बीच जिंदगी गुजार रहे रहवासियों का कहना है कि वर्षों से आवेदन और शिकायतें करने के बावजूद उनकी समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया।
धरना स्थल पर लगाई गई एक बड़ी फ्रेम इस आंदोलन की सबसे खास तस्वीर बन गई है। इस फ्रेम में पूर्व में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर से दिया गया लिखित आश्वासन प्रदर्शित किया गया है। रहवासियों का कहना है कि जब लिखित आश्वासन के बाद भी सड़क और नाली का काम जमीन पर नहीं हुआ, तो अब उस आश्वासन को ही सवाल बनाकर धरना स्थल पर लगाया गया है।
35 साल से शिकायतें, फिर भी सड़क-नाली का इंतजार
रहवासियों द्वारा प्रस्तुत पुराने आवेदन में बताया गया था कि रेवा नगर कॉलोनी नगर पालिका या पंचायत में शामिल नहीं होने के कारण सड़क, पानी, बिजली और नाली जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रही है। आवेदन में 20 जून 2022, 20 जनवरी 2026 और 24 मार्च 2026 को दिए गए पूर्व आवेदनों का भी उल्लेख है।
रहवासियों का कहना है कि इसके बाद भी शिकायतों और आवेदनों का सिलसिला रुका नहीं। एसडीएम से लेकर कलेक्टर तक अधिकारियों के समक्ष सड़क, नाली और अन्य मूलभूत सुविधाओं की मांग रखी गई।
यानी मामला किसी एक आवेदन या कुछ दिनों की नाराजगी का नहीं है। रहवासी दावा कर रहे हैं कि वे वर्षों से व्यवस्था का दरवाजा खटखटा रहे हैं, लेकिन समाधान अब तक फाइलों और आश्वासनों से आगे नहीं बढ़ पाया।
लिखित आश्वासन की फ्रेम अब प्रशासन से पूछ रही सवाल
रहवासियों के अनुसार इससे पहले भी वे अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे थे। धरने के दूसरे दिन बड़वाह एसडीएम श्री सत्यनारायण दर्रो और बड़वाह विधायक श्री सचिन बिरला मौके पर पहुंचे थे। रहवासियों से चर्चा के दौरान सड़क और नाली की समस्या के समाधान को लेकर लिखित आश्वासन दिया गया था।
आज वही लिखित आश्वासन धरना स्थल पर बड़ी फ्रेम में लगाया गया है।
रहवासियों का कहना है कि यह फ्रेम केवल एक कागज नहीं, बल्कि उस भरोसे की तस्वीर है जो उन्हें प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मिला था। सवाल यह है कि यदि समस्या के समाधान का लिखित आश्वासन दिया गया था तो उसके बाद सड़क और नाली का काम आखिर क्यों नहीं हुआ?
क्या आश्वासन सिर्फ धरना खत्म कराने तक सीमित था? क्या अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों द्वारा दिए गए लिखित आश्वासन की कोई समयसीमा और जवाबदेही तय नहीं थी? और अगर काम होना था तो 12 दिन से फिर रहवासियों को सड़क पर बैठकर अपनी मांग क्यों उठानी पड़ रही है?
प्लॉट बिके, मकान बने, लेकिन मूलभूत सुविधाएं अब भी अधूरी
कॉलोनीवासियों का आरोप है कि कॉलोनाइजर ने प्लॉट विकसित कर बेच दिए और लोगों ने अपनी जिंदगी की जमा पूंजी लगाकर यहां मकान बनाए, लेकिन सड़क और जल निकासी जैसी जरूरी सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था आज भी नहीं हो सकी।
बारिश के दिनों में परेशानी कई गुना बढ़ जाती है। सड़क नहीं होने से रास्तों पर कीचड़ और पानी जमा हो जाता है। नालियों की व्यवस्था नहीं होने से जल निकासी बाधित रहती है। गंदगी और मच्छरों के कारण रहवासियों को अलग परेशानी उठानी पड़ती है।
सवाल यह भी है कि जिन परिवारों ने वर्षों पहले यहां अपने घर बनाए, क्या उन्हें आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए इसी तरह संघर्ष करना पड़ेगा?
12 दिन का धरना, अब आश्वासन नहीं चाहिए
कॉलोनीवासियों का कहना है कि आवेदन दिए गए, अधिकारियों से मुलाकात हुई, जनप्रतिनिधियों से चर्चा हुई और लिखित आश्वासन भी मिला। लेकिन सड़क और नाली की समस्या आज भी जस की तस है।
अब 12 दिनों से जारी धरने के बीच रहवासियों की मांग साफ है—उन्हें एक और आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर काम चाहिए।
प्रशासन से सवाल है कि 35 वर्षों से चली आ रही इस समस्या का स्थायी समाधान कब होगा? जनप्रतिनिधियों से सवाल है कि चुनाव और आश्वासन के बीच जनता को बुनियादी सुविधाओं के लिए आखिर कब तक संघर्ष करना पड़ेगा? और सबसे बड़ा सवाल—जब लिखित आश्वासन पहले ही दिया जा चुका था, तो उसे पूरा कराने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?












