(“विधायक के इशारे पर जनपद चलाना बंद करो”—कांग्रेस की दो टूक चेतावनी | प्रदर्शन में CEO को सुनाई खरी-खोटी, SDM को सौंपा जांच आवेदन)
बड़वाह। (सुनील परिहार) जनपद पंचायत बड़वाह में कथित भ्रष्टाचार, पक्षपातपूर्ण कार्यप्रणाली और शिकायतों की अनदेखी के आरोपों को लेकर बुधवार को कांग्रेस ने जमकर हल्लाबोल किया। जनपद पंचायत कार्यालय में प्रदर्शन के दौरान माहौल उस समय और गरमा गया, जब मौके पर पहुंची महिलाओं ने CEO मुकेश जैन के निवास का घेराव कर दिया। काफी देर तक चले विरोध-प्रदर्शन के बाद CEO बाहर आए, जहां प्रदर्शनकारियों ने अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की और उन्हें जमकर खरी-खोटी सुनाई।
कांग्रेस नेताओं ने CEO की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि जनपद पंचायत को नियम-कायदे और संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार चलाने के बजाय राजनीतिक प्रभाव में चलाया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने दो टूक कहा—“जनपद पंचायत किसी विधायक के इशारे पर नहीं, बल्कि नियम और संविधान के अनुसार चलेगी।”
CEO निवास तक पहुंचा विरोध, महिलाओं ने घेरा


प्रदर्शन के दौरान मामला उस वक्त और गरमा गया, जब महिलाएं CEO के निवास तक पहुंच गईं और घेराव कर विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों का गुस्सा इतना बढ़ गया कि CEO को बाहर आकर लोगों की बात सुननी पड़ी। मौके पर जमकर नारेबाजी हुई और अधिकारियों की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल दागे गए।
प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि ग्रामीण क्षेत्र से जुड़े मामलों में आमजन और निर्वाचित प्रतिनिधियों की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। उनका कहना था कि जब लगातार आवेदन और शिकायतें दी जा रही हैं, तो उन पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
RTI ने बढ़ाई परेशानी—जानकारी मांगी, जवाब का इंतजार
मामले में RTI को लेकर भी सवाल खड़े किए गए। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, जनपद पंचायत के एक निर्वाचित सदस्य जितेंद्रसिंह सोलंकी ने 27 अप्रैल 2026 को लोक सूचना अधिकारी, जनपद पंचायत बड़वाह के नाम सूचना के अधिकार के तहत आवेदन प्रस्तुत किया था। आरोप है कि 1 जून 2026 तक न तो मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराई गई और न ही कोई पत्र प्राप्त हुआ।
कांग्रेस ने सवाल उठाया कि जब RTI कानून सरकारी कामकाज में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का अधिकार देता है, तो फिर जानकारी देने में देरी क्यों हुई?
“2025 से आवेदन दे रहे हैं, फिर भी जानकारी नहीं!
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि वर्ष 2025 से अब तक जनपद पंचायत कार्यालय में विभिन्न मामलों को लेकर कई आवेदन दिए जा चुके हैं, लेकिन आवेदकों को अपेक्षित जानकारी और कार्रवाई नहीं मिल रही है। इसी को लेकर कांग्रेस ने जनपद की कार्यप्रणाली पर सवालों की बौछार कर दी।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि सब कुछ नियमों के मुताबिक हो रहा है तो शिकायतकर्ताओं को बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने की नौबत क्यों आ रही है?
“अधिकारी राजनीतिक दबाव से ऊपर उठकर काम करें”
कांग्रेस ने CEO मुकेश जैन को चेतावनी देते हुए कहा कि प्रशासनिक अधिकारी को किसी भी राजनीतिक दबाव या प्रभाव से ऊपर उठकर निष्पक्षता से काम करना चाहिए। पार्टी ने आरोप लगाया कि जनपद की कार्यप्रणाली में कथित पक्षपात को लेकर ग्रामीणों और निर्वाचित प्रतिनिधियों में नाराजगी बढ़ रही है।
कांग्रेस ने साफ शब्दों में कहा कि जनपद पंचायत किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल की निजी संस्था नहीं, बल्कि ग्रामीण जनता और निर्वाचित प्रतिनिधियों की संवैधानिक संस्था है।
प्रदर्शन के बाद SDM को सौंपा जांच आवेदन
CEO के खिलाफ प्रदर्शन और घेराव के बाद कांग्रेस नेताओं एवं प्रदर्शनकारियों ने SDM को जांच आवेदन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। आवेदन में कथित भ्रष्टाचार, शिकायतों के निराकरण में देरी, RTI से जुड़ी जानकारी और अधिकारियों की कार्यप्रणाली की जांच की मांग रखी गई।












