PWD ने जेसीबी से बनाई 800 फीट कच्ची नाली, मनरेगा में 2178 मानव दिवस का भुगतान; जांच में ग्रामीणों ने भी बताया—नाली PWD ने बनाई
खंडवा। जनपद पंचायत छैगांव माखन की ग्राम पंचायत रेवाड़ा में मनरेगा के तहत हुए एक भुगतान ने सरकारी योजनाओं में होने वाले काम और भुगतान की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार “जल निकासी नाली निर्माण” के नाम पर मनरेगा से ₹4,81,338 का भुगतान किया गया। वर्क रजिस्टर में इस कार्य के लिए 2178 मानव दिवस दर्ज हैं और 41 मजदूरों को मजदूरी भुगतान दर्शाया गया है।
लेकिन मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस नाली के नाम पर मनरेगा से लाखों रुपये का भुगतान किया गया, उसे PWD द्वारा जेसीबी मशीन से बनाए जाने की बात सामने आ रही है।
किसान की शिकायत के बाद PWD ने बनाई थी नाली


जानकारी के अनुसार किसान मुकेश मोरान्या के खेत में खंडवा-केलवा मार्ग के निर्माण के दौरान जल निकासी बाधित हो गई थी। बारिश का पानी खेत में भरने की समस्या को लेकर किसान ने शिकायत की थी।
शिकायत के बाद कलेक्टर के निर्देश पर लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा लगभग 800 फीट लंबी कच्ची नाली जेसीबी मशीन से बनवाई गई, ताकि बारिश के पानी की निकासी हो सके।
मामले में PWD के तत्कालीन एसडीओ से फोन पर चर्चा की गई। उन्होंने स्वीकार किया कि संबंधित नाली का निर्माण PWD द्वारा ही कराया गया था। तत्कालीन एसडीओ के अनुसार, उन्हें कलेक्टर की ओर से मौखिक निर्देश मिले थे और PWD ने “गुडविल” के तहत नाली का निर्माण कराया था।
जांच अधिकारी ने भी किसान की शिकायत को बताया सही
मामले की जांच कर रहे सहायक उपयंत्री (AE) श्री बरकने से भी फोन पर चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि किसान की शिकायत सही पाई गई है और जांच के दौरान मौके का मुआयना किया गया।
AE के अनुसार, जांच के दौरान गांव के लोगों से भी पूछताछ की गई। ग्रामीणों ने भी यही बताया कि संबंधित नाली का निर्माण PWD द्वारा ही किया गया था।
ऐसे में अब सवाल यह है कि यदि नाली का निर्माण PWD ने किया था, तो ग्राम पंचायत के मनरेगा रिकॉर्ड में उसी कार्य के नाम पर ₹4,81,338 का भुगतान और 2178 मानव दिवस किस आधार पर दर्ज किए गए?
मनरेगा के रिकॉर्ड में आखिर किस काम की मजदूरी?


उपलब्ध वर्क रजिस्टर के अनुसार इस कार्य में 41 मजदूरों को मजदूरी भुगतान दर्शाया गया है। ऐसे में जांच का मुख्य बिंदु यही है कि क्या वास्तव में मनरेगा के मजदूरों से उक्त नाली का निर्माण कराया गया था या PWD द्वारा मशीन से बनाए गए कार्य को मनरेगा के रिकॉर्ड में दर्ज कर भुगतान किया गया?
मामला कई सवाल खड़े करता है—
- जब नाली PWD ने जेसीबी से बनाई तो मनरेगा में मजदूरी भुगतान किस काम के लिए किया गया?
- 2178 मानव दिवस किन वास्तविक कार्यों के आधार पर दर्ज किए गए?
- 41 मजदूरों ने वास्तव में कौन सा कार्य किया?
- क्या मौके पर कार्य का सत्यापन किया गया था?
- मनरेगा की MB (Measurement Book) में क्या दर्ज है?
- इस कार्य की TS (Technical Sanction) किस आधार पर जारी हुई?
- यदि PWD और मनरेगा दोनों में एक ही कार्य दर्ज है, तो भुगतान की जिम्मेदारी किसकी बनती है?
MB और TS मांगी गई, लेकिन अभी तक नहीं मिली
जांच अधिकारी सहायक उपयंत्री श्री बरकने ने बताया कि इस मामले में अभी तक जांच प्रतिवेदन जिला पंचायत को नहीं भेजा गया है। उनके अनुसार, जनपद पंचायत सीईओ द्वारा ही प्रतिवेदन जिला पंचायत को भेजा जाएगा।
उन्होंने यह भी बताया कि जांच के दौरान ग्राम पंचायत से संबंधित कार्य की MB और TS मांगी गई है, लेकिन ये दस्तावेज अभी तक प्राप्त नहीं हुए हैं।
यानी फिलहाल जांच में सामने आए मौके के निरीक्षण और ग्रामीणों के बयानों के अलावा मनरेगा के तकनीकी दस्तावेजों की जांच होना बाकी है। इन्हीं दस्तावेजों से यह स्पष्ट हो सकेगा कि रिकॉर्ड में दर्ज कार्य वास्तव में किस प्रकार और किस एजेंसी द्वारा कराया गया था।
तत्कालीन CEO का ट्रांसफर, अब नए CEO पर नजर
इस मामले में जनपद पंचायत छैगांव माखन के तत्कालीन सीईओ श्री डाले से जब कार्रवाई के संबंध में जानकारी मांगी गई तो उन्होंने अपने स्थानांतरण का हवाला देते हुए आगे की जानकारी वर्तमान अधिकारी से लेने की बात कही।
इधर, अब श्री डाले का स्थानांतरण हो चुका है। ऐसे में सवाल यह है कि जनपद पंचायत छैगांव माखन के नए सीईओ इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और जांच के आधार पर जिला पंचायत को क्या प्रतिवेदन भेजते हैं।
सरपंच और सचिव से भी पक्ष लेने का प्रयास
मामले में द इंडिया स्पीक्स ने ग्राम पंचायत रेवाड़ा के सरपंच और सचिव से भी उनका पक्ष जानने का प्रयास किया। हालांकि, उनकी ओर से इस मामले में कोई जवाब प्राप्त नहीं हो सका।
यदि ग्राम पंचायत के सरपंच या सचिव की ओर से कोई जवाब या स्पष्टीकरण प्राप्त होता है तो उसे भी खबर में शामिल किया जाएगा।
अब सबसे बड़ा सवाल—₹4.81 लाख का भुगतान किस काम के लिए?
एक तरफ PWD के तत्कालीन एसडीओ संबंधित नाली का निर्माण PWD द्वारा किए जाने की बात स्वीकार कर रहे हैं। दूसरी तरफ जांच अधिकारी के अनुसार मौके पर ग्रामीणों ने भी नाली PWD द्वारा बनाए जाने की बात कही है और किसान की शिकायत को सही पाया गया है।
वहीं, मनरेगा के उपलब्ध रिकॉर्ड में इसी कार्य के नाम पर ₹4.81 लाख से अधिक का भुगतान और 2178 मानव दिवस दर्ज हैं।
हालांकि, MB और TS सहित सभी मूल दस्तावेजों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मनरेगा में दर्ज कार्य और भुगतान की वास्तविक स्थिति क्या थी।
अब देखना होगा कि नए जनपद पंचायत सीईओ इस मामले में जांच प्रतिवेदन तैयार कर जिला पंचायत को भेजते हैं या नहीं और दस्तावेजों की जांच के बाद यदि कोई अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है।
सवाल सरकारी राशि का है और जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। आखिर जनता के पैसों से जुड़े इस मामले में सच क्या है—जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।












