नर्मदा किनारे बढ़ता प्रदूषण और प्रशासनिक खामोशी बड़े संकट का संकेत
खरगोन। The India Speaks Desk
इटली के वेनेटो क्षेत्र में स्थित Miteni फैक्ट्री का मामला आज भी दुनिया के बड़े पर्यावरणीय अपराधों में गिना जाता है। वर्षों तक चले रासायनिक प्रदूषण ने हजारों लोगों के पीने के पानी को दूषित किया, रक्त में खतरनाक रसायनों की मात्रा बढ़ी और अंततः अदालत को हस्तक्षेप करना पड़ा।
आज मध्यप्रदेश के खरगोन जिले के बड़वाह क्षेत्र में उठ रहे सवाल हमें उसी दिशा में झांकने को मजबूर कर रहे हैं — क्या हम समय रहते सबक लेंगे या फिर इतिहास खुद को दोहराएगा?
इटली से सबक: जब पानी ज़हर बन गया
वेनेटो के Vicenza प्रांत में स्थित मिटेनी फैक्ट्री से वर्षों तक PFAS जैसे “फॉरएवर केमिकल्स” का रिसाव हुआ। यह रसायन भूजल में घुल गया और हजारों परिवारों के शरीर में पहुंच गया।
नतीजा क्या हुआ?
रक्त में खतरनाक रसायनों की उच्च मात्रा
कैंसर और हार्मोनल असंतुलन के मामले
अदालत द्वारा ऐतिहासिक फैसला
फैक्ट्री बंद
यह घटना अचानक नहीं हुई थी — यह धीरे-धीरे बढ़ते प्रदूषण, प्रशासनिक ढिलाई और प्रारंभिक चेतावनियों की अनदेखी का परिणाम थी।
मध्यप्रदेश में उभरते सवाल और प्रशासनिक चुप्पी
खरगोन जिले के बड़वाह क्षेत्र में स्थित शराब कंपनियों को लेकर स्थानीय स्तर पर गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं।
आरोप हैं कि:
डिस्टिलरी अपशिष्ट (DWGS) खुले में बेचा जा रहा है
दूषित जल नालों के माध्यम से बहाया जा रहा है
यह जल छोटी नदियों में मिलकर अंततः Narmada River तक पहुंचता है यह केवल नियम उल्लंघन नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के साथ अन्याय है।
नर्मदा सिर्फ नदी नहीं, जीवनरेखा है
नदी का स्वभाव सीमाएँ नहीं जानता। वह पहाड़ों से निकलती है, मैदानों को सींचती है और राज्यों की रेखाओं को पार करती हुई समुद्र में समा जाती है। लेकिन जब नदी में जहर घुलता है, तो उसका असर भी सीमित नहीं रहता।
नर्मदा मध्यप्रदेश की जीवनरेखा है। करोड़ों लोगों की आस्था, पेयजल, सिंचाई और जैव विविधता इससे जुड़ी है। यदि औद्योगिक अपशिष्ट बिना कठोर निगरानी के इसमें मिल रहा है, तो यह केवल स्थानीय समस्या नहीं — यह राज्य स्तरीय संकट है।
क्या प्रशासन अपनी जिम्मेदारी निभा रहा हैं?
यदि Zero Liquid Discharge (ZLD) नियम लागू हैं, तो:
क्या नियमित सैंपलिंग हो रही है?
क्या रिपोर्ट सार्वजनिक है?
क्या स्वतंत्र पर्यावरण ऑडिट कराया गया है?
यदि नहीं, तो यह वही चूक है जिसने इटली को संकट में डाला था।
इटली की कहानी हमें चेतावनी देती है —
पर्यावरण अपराध पहले “छोटा मुद्दा” लगता है,
फिर “स्थानीय समस्या” बनता है,
और अंततः “राष्ट्रीय संकट” में बदल जाता है।
मध्यप्रदेश के लिए यह समय है कि इसकी पारदर्शी जांच, स्वतंत्र जल परीक्षण, रिपोर्ट सार्वजनिक करना और यदि उल्लंघन सिद्ध हो तो कठोर कार्रवाई किया जाना चाहिए।
इटली की मिटेनी घटना कोई दूर की कहानी नहीं — वह एक चेतावनी है।
यदि नर्मदा किनारे प्रदूषण के आरोप सही हैं और समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो भविष्य में स्वास्थ्य, पर्यावरण और न्यायालय — तीनों मोर्चों पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।
प्रश्न यह नहीं है कि “क्या होगा?”
प्रश्न यह है — “क्या हम होने से पहले रोकेंगे?”












