जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर उठे सवाल, सड़क बनी तालाब… आखिर जिम्मेदार कौन?
बड़वाह | सुनील परिहार
बड़वाह शहर के प्रवेश द्वार पर स्थित गोविंद पैलेस के सामने पुराना एसएच-27 एक बार फिर पहली तेज बारिश में पानी से लबालब भर गया। सड़क पर ऐसा जलभराव हुआ कि राहगीरों, दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को जान जोखिम में डालकर निकलना पड़ा। सबसे बड़ा सवाल यह है कि हर साल होने वाली इस समस्या पर आखिर कोई जनप्रतिनिधि खुलकर आवाज क्यों नहीं उठा रहा?
कुछ समय पहले राजस्व प्रशासन ने खुदाई कर वर्षों से दब चुकी पुलिया का पता तो लगा लिया था। उस समय उम्मीद जगी थी कि अब स्थायी समाधान होगा, लेकिन आज तक स्थिति जस की तस बनी हुई है। पुलिया मिलने के बाद भी जल निकासी की व्यवस्था शुरू नहीं होना प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
नगर पालिका अपने पत्रों में स्वीकार कर चुकी है कि इस स्थान पर हर वर्ष जलभराव होता है और आवागमन प्रभावित होता है। इसके बावजूद न तो स्थायी नाला बना, न जल निकासी की व्यवस्था सुधरी और न ही जिम्मेदार विभागों के बीच समन्वय दिखाई दिया।
सबसे हैरानी की बात यह है कि जब जिम्मेदारी तय करने की बात आती है तो हर विभाग पल्ला झाड़ लेता है। कोई इसे ग्राम पंचायत का मामला बताता है, कोई एमपीआरडीसी का, तो कोई एनएचएआई का। नतीजा यह कि सड़क जनता की है, परेशानी जनता की है, लेकिन जिम्मेदारी लेने वाला कोई नजर नहीं आता।
इधर जलभराव के बीच सड़क किनारे लगी बिजली की डीपी भी हर बारिश में खतरे का कारण बनी रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते समाधान नहीं किया गया तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
अब शहरवासियों के सवाल सीधे और साफ हैं—
जब पुलिया मिल गई तो काम क्यों नहीं हुआ? जल निकासी किसने रोकी? हर साल करोड़ों के विकास के दावों के बावजूद बड़वाह का प्रवेश मार्ग बारिश में तालाब क्यों बन जाता है?
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि शहर के इस गंभीर मुद्दे पर जनप्रतिनिधियों की चुप्पी भी लोगों को खल रही है। जनता का कहना है कि यदि समय रहते सभी जिम्मेदार विभाग और जनप्रतिनिधि एक साथ बैठकर समाधान निकालें तो वर्षों पुरानी यह समस्या खत्म हो सकती है।
फिलहाल हकीकत यही है कि बड़वाह की जनता हर मानसून में सिर्फ बारिश नहीं झेलती, बल्कि विकास के दावों की सच्चाई भी पानी में डूबती हुई देखती है।












