“The India Speaks” की खबरों के बाद पंचायत सख्त, अब अराजक तत्वों की हरकत ने बढ़ाया बवाल
बड़वाह। लोकेश कोचले, प्रधान संपादक | The India Speaks
मध्यप्रदेश के बड़वाह क्षेत्र के ग्राम खोड़ी में शराब कंपनी के भारी वाहनों को लेकर शुरू हुआ विवाद अब और गहराता जा रहा है। ग्राम पंचायत कदवालिया द्वारा लगाए गए सूचना पट्ट, जिसमें 10 टन से अधिक वजनी वाहनों के प्रवेश पर रोक का आदेश था, उसे अराजक तत्वों ने फाड़ दिया। इस घटना के बाद गांव में आक्रोश और तेज हो गया है।
पंचायत का बड़ा फैसला
ग्राम पंचायत ने कुछ दिन पहले मप्र पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 7 के तहत आदेश जारी कर दिया था कि 10 टन से भारी वाहन गांव में प्रवेश नहीं कर पाएंगे।
कारण साफ था — शराब कंपनी के ट्रकों के चलते गांव की सड़कें पूरी तरह टूट चुकी हैं और स्कूली बच्चों, महिलाओं व आम राहगीरों की सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा था।
The India Speaks की रिपोर्टिंग का असर
“The India Speaks” ने लगातार सड़क क्षरण और कंपनी की जिम्मेदारी को लेकर खबरें प्रकाशित की थीं। इसके बाद प्रशासन हरकत में आया और NHAI ने हाईवे पर बैरिकेड्स लगवा दिए, जिससे अब शराब कंपनी के ट्रकों को गांव के अंदर से होकर ही गुजरना पड़ रहा है। इसी से ग्रामीणों का गुस्सा और भड़क गया।
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सूचना पट्ट फाड़कर पंचायत के आदेश को चुनौती


ग्राम पंचायत द्वारा लगाया गया सूचना पट्ट (बोर्ड), जिस पर वाहनों की सीमा स्पष्ट लिखी थी, अब अराजक तत्वों द्वारा फाड़ दिया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह हरकत शराब कंपनी के दबाव में की गई, ताकि आदेश का असर खत्म हो सके।
ग्रामीणों का कहना है –
“यह साफतौर पर गांव के फैसले को कमजोर करने की कोशिश है। पंचायत का आदेश जनता की सुरक्षा के लिए था, लेकिन कंपनी को बचाने के लिए कुछ लोगों ने इसे फाड़ डाला।”
सड़क निर्माण कंपनी ने भी पल्ला झाड़ा
सड़क का निर्माण करने वाली कंपनी MEWARA MACADAM PVT. LTD. ने पहले ही साफ कर दिया है कि —
“हमने 2021 में इस सड़क का डामरीकरण सिर्फ 10 टन तक के वाहनों के लिए किया था। अब 40-60 टन के वाहन चल रहे हैं, जिससे सड़क क्षतिग्रस्त हो रही है। इसकी जिम्मेदारी हमारी नहीं होगी।”
शराब कंपनी पर बढ़ते सवाल
अब पूरा गांव और पंचायत सवाल पूछ रही है कि आखिर इतनी बड़ी शराब कंपनी एसोसिएटेड अल्कोहल एंड ब्रेवरीज लिमिटेड ग्रामीणों की सड़क और सुरक्षा की जिम्मेदारी क्यों नहीं ले रही?
एक तरफ कंपनी करोड़ों का कारोबार कर रही है।
दूसरी तरफ ग्रामीण मार्ग पूरी तरह तबाह हो चुका है।
अब पंचायत के आदेश को फाड़ने की घटना से ग्रामीणों का गुस्सा चरम पर है।
⚡ निष्कर्ष
खोड़ी मार्ग की जंग अब सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह जनता बनाम शराब कंपनी का बड़ा टकराव बन गई है। पंचायत का आदेश फाड़ना इस बात का सबूत है कि किसी को गांव के फैसले से दिक्कत है। अब देखना होगा कि प्रशासन और शासन इस मामले पर कितना सख्त कदम उठाता है।












