मेघा इंजीनियरिंग द्वारा बड़ेल–कुंडी से सांवेर तक चल रहा पाइपलाइन कार्य बिना सूचना किए जाने का आरोप
बड़वाह/ ओखला। The India Speaks Desk
NVDA (नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण) की सागर माइक्रो सिंचाई परियोजना में लगभग 2700 करोड़ रुपये की लागत से सिंचाई विस्तार का कार्य चल रहा है। इस परियोजना के कार्यान्वयन का जिम्मा मेघा इंजीनियरिंग को सौंपा गया है, जो बड़ी पाइपलाइन एग्रीगेशन लाइन बिछा रही है। यह लाइन ग्राम कुंडी–बड़ेल से होते हुए सांवेर तक पहुंचेगी। योजना के पूर्ण होने पर खरगोन, उज्जैन और इंदौर जिले के करीब 80,000 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई का लाभ मिलेगा।
ग्रामीणों का आरोप — “बिना बताए खेतों में खुदाई, फसल बर्बाद”
ग्राम ओखला व चंदू पूरा के ग्रामीण किसानों ने NVDA की इस परियोजना पर गंभीर आपत्ति जताते हुए कहा कि बिना किसी प्रकार की पूर्व सूचना दिए उनके खेतों में पाइपलाइन डालने के लिए खुदाई शुरू कर दी गई।
इससे कई किसानों की फसल (बौनी) खराब हो गई, जिसके बाद गांव के लोगों ने कार्य रुकवा दिया।
“हमारे खेतों में खुदाई मशीनें आ गईं, लेकिन हमें बताए बिना काम शुरू किया गया। फसलें खराब हुई हैं, जब तक उचित मुआवजा नहीं मिलता काम नहीं होने देंगे।”
किसानों के साथ जयस संगठन भी मौके पर पहुंचा और कार्य को तुरंत रुकवाया।
कंपनी की सफाई — “प्रभावित किसानों को मिलेगा मुआवजा”
मेघा इंजीनियरिंग के पदाधिकारियों ने बताया कि किसानों की आपत्ति उचित है और
सभी प्रभावित किसानों को नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा।
परियोजना में 3 पंप हाउस और 2 सब-स्टेशन भी शामिल हैं, जो पूरी सिंचाई प्रणाली को संचालित करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
जयस संगठन किसानों के साथ — “मुआवजा मिलने तक विरोध जारी रहेगा”
पूरा मामला बढ़ने पर जयस संगठन सक्रिय दिखा।
जयस ब्लॉक कार्यकारी अध्यक्ष राधे परिहार ने कहा—
“किसानों के अधिकारों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जब तक किसानों को उचित मुआवजा नहीं मिलता, जयस उनके साथ रहेगा और काम नहीं होने दिया जाएगा।”
इस दौरान जयस की पूरी टीम ग्रामीणों के साथ मौजूद रही, जिनमें—
जयस बड़वाह विधानसभा प्रभारी चेतन मंडलोई, जयस प्रवक्ता संजय बामनिया, रंजीत बामणिया, दिलीप ठाकुर, तेजराम मौरे सहित कई कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे।












