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कागज़ों में जांच, ज़मीन पर खेल? CPCB टीम के नाम पर प्लांट बंद कर सबूत साफ किए गए!

बड़वाह। The India Speaks Desk

बड़वाह के ग्राम खोड़ी स्थित शराब कंपनी Associated Alcohol & Breweries Limited एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। DWGS के अवैध उपयोग और ZLD उल्लंघन को लेकर जब केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की टीम के आने की सूचना सामने आई, तो उससे पहले ही कथित तौर पर कंपनी परिसर में तीन दिन तक साक्ष्य मिटाने के लिए व्यापक सफाई अभियान चलाए जाने की जानकारी The India Speaks को आंतरिक सूत्रों से प्राप्त हुई।

CPCB आने से पहले क्यों बंद हुआ DWGS प्लांट?

सूत्रों के अनुसार, CPCB टीम के संभावित निरीक्षण से ठीक पहले—
DWGS प्लांट को 4 दिनों तक बंद रखा गया
परिसर में युद्धस्तर पर सफाई कराई गई
पुराने अपशिष्ट और संभावित साक्ष्य हटाए गए
The India Speaks द्वारा जब इस पूरे घटनाक्रम को लेकर MPPCB के क्षेत्रीय अधिकारी श्री चौकसे से फोन पर चर्चा की गई, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि—
“मैं नहीं, CPCB की टीम जांच के लिए आने वाली है।”

दो दिन इंतज़ार, लेकिन CPCB टीम नहीं पहुंची

इसके बाद The India Speaks ने लगातार दो दिनों तक CPCB टीम का इंतज़ार किया, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि—
CPCB की टीम कभी खोड़ी नहीं पहुंची
न कोई आधिकारिक निरीक्षण हुआ
न ही कोई सार्वजनिक रिपोर्ट सामने आई
और इससे भी अधिक चौंकाने वाली बात यह रही कि—
👉 चार दिन DWGS प्लांट बंद रहने के बाद, अगले ही दिन फिर से DWGS से भरी गाड़ियां निकलने लगीं।

सबसे बड़ा सवाल — CPCB की जानकारी कंपनी को कैसे मिली?

अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ा और गंभीर सवाल यह उठ रहा है कि—
CPCB की टीम आने वाली है — यह अत्यंत गोपनीय सूचना
शराब कंपनी को पहले से कैसे पता चल गई?
क्या इसी सूचना के आधार पर प्लांट बंद कर साक्ष्य मिटाए गए?
स्थानीय लोगों का सीधा आरोप है कि—
“जब तक ऊपर से संरक्षण नहीं होगा, इतनी बड़ी तैयारी संभव नहीं।”

जांच के लिए निकली टीम खोड़ी क्यों नहीं पहुंची?

अब एक और गंभीर सवाल सामने है—
जो टीम जांच के लिए रवाना हुई थी
वह खोड़ी कंपनी तक पहुंची ही क्यों नहीं?
क्या रास्ते में ही सांठगांठ कर जांच को रोक दिया गया?
यदि जांच एजेंसियां ही इस तरह का रवैया अपनाएंगी, तो फिर नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियां बेखौफ होकर अपनी मनमानी करेंगी — ऐसा स्थानीय लोगों का कहना है।

DWGS जैसे जहरीले औद्योगिक अपशिष्ट को लेकर लगातार चेतावनियों, रिपोर्टिंग और शिकायतों के बावजूद यदि जांच से पहले ही साक्ष्य मिटाए जा रहे हैं और जांच टीमें मौके तक नहीं पहुंच रहीं, तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि सिस्टम फेल्योर की ओर इशारा करता है।
अब सवाल सिर्फ DWGS का नहीं रहा—
सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेंगे?

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