बड़वाह | The India Speaks Desk
बड़वाह तहसील के ग्राम खोड़ी स्थित एसोसिएट अल्कोहल एंड ब्रेवरीज लिमिटेड एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। गुरुवार को सैकड़ों DWGS व्यापारियों ने कंपनी के मुख्य द्वार पर धरना देकर कंपनी प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। व्यापारियों का आरोप है कि फैक्ट्री से निकलने वाले DWGS (Distillery Wet Grain Solids) की बिक्री केवल एक सीमित सिंडिकेट के माध्यम से की जा रही है, जिससे खुले बाजार में कृत्रिम कमी पैदा हो रही है और पशुपालकों व दुग्ध व्यवसायियों को अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।


व्यापारियों की मांग है कि कंपनी सभी पंजीकृत खरीदारों को समान अवसर देते हुए सीधे DWGS उपलब्ध कराए, ताकि बाजार में पारदर्शिता बनी रहे और किसी एक समूह का नियंत्रण समाप्त हो।
धरने से बढ़ी हलचल, पुलिस और प्रशासन पहुंचा मौके पर
सैकड़ों लोगों के एकत्र होने के बाद बड़वाह थाना पुलिस सुरक्षा व्यवस्था के लिए मौके पर पहुंची। अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) एवं तहसीलदार के निर्देश पर हल्का पटवारी रेखा चौधरी भी स्थल पर मौजूद रहीं।
पटवारी रेखा चौधरी ने बताया कि लोग भूसी की खरीद को लेकर एकत्र हुए हैं और उनकी कंपनी प्रबंधन से बातचीत चल रही है। उन्होंने DWGS विवाद पर कोई टिप्पणी नहीं की।
व्यापारियों के अनुसार कंपनी ने उनकी मांगों पर विचार करने के लिए दो दिन का समय मांगा है। हालांकि बातचीत के बाद भी प्रदर्शनकारी संतुष्ट नहीं हुए और कंपनी के बाहर टेंट लगाकर धरना जारी रखा।
क्या है DWGS?
DWGS (Distillery Wet Grain Solids) शराब उद्योग में अनाज से अल्कोहल बनाने की प्रक्रिया के बाद बचा हुआ गीला अवशेष होता है। इसमें नमी बहुत अधिक होती है और यह जल्दी खराब होने लगता है। कई स्थानों पर इसका उपयोग पशु आहार के रूप में किया जाता है, लेकिन इसका उपयोग गुणवत्ता, भंडारण और नियामकीय मानकों के अनुरूप होना आवश्यक माना जाता है।
गलत तरीके से उपयोग या भंडारण से क्या हो सकते हैं खतरे?
विशेषज्ञों के अनुसार यदि DWGS का उचित तरीके से प्रसंस्करण, भंडारण और परिवहन नहीं किया जाए तो इसमें फफूंद और हानिकारक सूक्ष्मजीव विकसित हो सकते हैं। खराब गुणवत्ता वाला या सड़ा हुआ पदार्थ पशुओं के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। इससे दुग्ध उत्पादन में कमी, पाचन संबंधी समस्याएं तथा अन्य स्वास्थ्य जोखिम बढ़ सकते हैं। खुले में बड़े पैमाने पर भंडारण से दुर्गंध, मक्खियों की संख्या बढ़ने और स्थानीय पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव की आशंका भी रहती है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियम क्या कहते हैं?
भारत में डिस्टिलरी उद्योगों के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा पर्यावरणीय मानकों का पालन अनिवार्य किया गया है।
Zero Liquid Discharge (ZLD) व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि डिस्टिलरी से निकलने वाला अपशिष्ट जल बिना उपचार के बाहर न छोड़ा जाए और उसका पुनर्चक्रण या वैज्ञानिक निस्तारण किया जाए। यदि किसी उद्योग द्वारा पर्यावरणीय शर्तों या स्वीकृत संचालन नियमों का उल्लंघन किया जाता है, तो उसके विरुद्ध जांच, नोटिस, पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति अथवा अन्य वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है।
पुराने विवाद फिर आए चर्चा में
यह पहला अवसर नहीं है जब यह मामला सुर्खियों में आया हो। DWGS के उत्पादन, प्रबंधन और बिक्री को लेकर पहले भी कई बार सवाल उठ चुके हैं। द इंडिया स्पीक्स पिछले एक वर्ष से इस विषय पर लगातार समाचार प्रकाशित करता रहा है तथा संबंधित विभागों के समक्ष शिकायतें भी उठाई जाती रही हैं। दूसरी ओर प्रशासन पूर्व में हुई अपनी जांचों में अनियमितता नहीं पाए जाने की बात कह चुका है।
धमकी के आरोप भी लगे
धरने पर बैठे कुछ व्यापारियों ने आरोप लगाया कि सिंडिकेट से जुड़े कुछ लोगों ने उन्हें गंभीर धमकियां दी हैं। उनका कहना है कि उन्हें सड़क पर दिखाई देने पर वाहन चढ़ाने तक की धमकी दी गई है।
द इंडिया स्पीक्स इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता है। यदि इस संबंध में पुलिस या संबंधित पक्ष का आधिकारिक बयान प्राप्त होता है, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
अब सबसे बड़ा सवाल
क्या DWGS की बिक्री प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है?
क्या पर्यावरणीय नियमों का पूर्ण पालन हो रहा है?
और सबसे महत्वपूर्ण—क्या प्रशासन इस विवाद की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई जनता के सामने लाएगा?
इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में प्रशासनिक कार्रवाई और संबंधित विभागों की जांच पर निर्भर करेंगे।












