खरगोन। लोकेश कोचले| द इंडिया स्पीक्स
जिले में स्वास्थ्य सेवाओं और विभिन्न स्वास्थ्य अभियानों की जमीनी प्रगति को लेकर आयोजित जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में ऐसे आंकड़े सामने आए, जिन्होंने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दस्तक अभियान में अब तक सिर्फ 14 प्रतिशत उपलब्धि, जिले में 2367 बच्चों का टीकाकरण ओवरड्यू और हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं के प्रबंधन में कुछ क्षेत्रों की अपेक्षाकृत कम प्रगति सामने आने के बाद कलेक्टर गुरु प्रसाद ने अधिकारियों को लक्ष्य शत-प्रतिशत पूरा करने के निर्देश दिए।
कलेक्ट्रेट सभागृह में हुई बैठक में स्वास्थ्य एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों के साथ जिले में संचालित स्वास्थ्य कार्यक्रमों और योजनाओं की समीक्षा की गई। बैठक में सामने आई कम प्रगति पर कलेक्टर ने नाराजगी जताते हुए समय-सीमा में लक्ष्य पूरा नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी।
दस्तक अभियान की रफ्तार सुस्त, अब तक सिर्फ 14% उपलब्धि
14 जुलाई से 31 अगस्त 2026 तक चल रहे दस्तक अभियान की समीक्षा में अब तक सिर्फ 14 प्रतिशत उपलब्धि सामने आई। अभियान की निर्धारित अवधि पूरी होने में समय रहते हुए भी इतनी कम प्रगति ने स्वास्थ्य विभाग की मैदानी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।
कलेक्टर गुरु प्रसाद ने कम प्रगति पर नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारियों को अभियान की निर्धारित अवधि में शत-प्रतिशत लक्ष्य पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूरा नहीं होने पर संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
2367 बच्चे टीकाकरण में ओवरड्यू, झिरन्या और बड़वाह में संख्या अधिक
राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम की समीक्षा के दौरान एक और महत्वपूर्ण आंकड़ा सामने आया। पिछले माह तक जिले में 2367 बच्चे टीकाकरण के लिए ओवरड्यू पाए गए।
इनमें झिरन्या और बड़वाह में संख्या अधिक बताई गई। इसके बाद कलेक्टर ने प्रत्येक बच्चे की नामजद सूची तैयार कर व्यक्तिगत स्तर पर फॉलोअप करने और शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब बच्चों के टीकाकरण की निगरानी के लिए स्वास्थ्य तंत्र मौजूद है, तो आखिर इतनी बड़ी संख्या में बच्चे समय पर टीकाकरण से कैसे छूट गए?
हाईरिस्क गर्भवतियों के प्रबंधन में चार क्षेत्रों में कम प्रगति
बैठक में हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं के उपचार और प्रबंधन की भी समीक्षा की गई। इसमें गोगावां, खरगोन शहरी, बड़वाह और कसरावद में अपेक्षाकृत कम प्रगति पाए जाने की बात सामने आई।
कलेक्टर ने हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं का शत-प्रतिशत प्रबंधन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। गंभीर एनीमिया से पीड़ित गर्भवती महिलाओं को आवश्यकता के अनुसार ब्लड ट्रांसफ्यूजन कराने और सभी विकासखंडों में एनीमिया नियंत्रण के लिए प्रभावी कार्रवाई करने को कहा गया।
बड़वाह सहित इन क्षेत्रों में कम प्रगति सामने आना इस बात की ओर इशारा करता है कि हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं की पहचान, निगरानी और समय पर उपचार को लेकर मैदानी स्तर पर और अधिक गंभीरता की जरूरत है।
59 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, फिर भी प्रसव केंद्रों को क्रियाशील करने के निर्देश
जिले में वर्तमान में 59 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र संचालित हैं। बैठक में कलेक्टर ने सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में प्रसव केन्द्रों को क्रियाशील करने और आगामी माह में शत-प्रतिशत प्रसव स्वास्थ्य संस्थाओं में ही कराने के निर्देश दिए।
यहां भी सवाल खड़ा होता है कि जब जिले में 59 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र संचालित हैं, तो सभी प्रसव केंद्रों को क्रियाशील करने के लिए अब विशेष निर्देश देने की जरूरत क्यों पड़ी? हालांकि बैठक में कितने प्रसव केंद्र वर्तमान में पूरी तरह क्रियाशील नहीं हैं, इसका आंकड़ा सामने नहीं रखा गया।
सिकल सेल स्क्रीनिंग में भी शत-प्रतिशत लक्ष्य का दबाव
मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान के तहत आगामी छह माह तक जिले में आयोजित होने वाले शिविरों में सिकल सेल की शत-प्रतिशत स्क्रीनिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
सिकल सेल से पीड़ित गर्भवती महिलाओं की संभावित प्रसव तिथि की जानकारी लेकर उन्हें समय पूर्व स्वास्थ्य संस्थाओं में भेजने और सभी पॉजिटिव मरीजों का उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।
जिले में 1471 टीबी मरीज, स्क्रीनिंग में तेजी के निर्देश
टीबी मुक्त भारत अभियान की समीक्षा में निश्चय स्क्रीनिंग कार्य में प्रगति लाने के निर्देश दिए गए। बैठक में बताया गया कि जिले में वर्तमान में 1471 टीबी मरीज हैं।
प्रत्येक कैंप में मरीजों को फूड बास्केट उपलब्ध कराने के लिए राशि जारी किए जाने की जानकारी दी गई। कलेक्टर ने मरीजों को गुणवत्तापूर्ण फूड बास्केट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए और इसके लिए नोडल अधिकारी डॉ. हर्ष महाजन को आवश्यक कार्रवाई करने को कहा।
एनआरसी की व्यवस्थाओं की भी होगी निगरानी
कलेक्टर ने सभी विकासखंड चिकित्सा अधिकारियों और परियोजना अधिकारियों को सप्ताह में किसी एक दिन सामूहिक रूप से पोषण पुनर्वास केन्द्र (NRC) का भ्रमण करने के निर्देश दिए।
भ्रमण के दौरान सामने आने वाली कमियों को दूर करने के साथ भर्ती मरीजों से सीधे बातचीत कर व्यवस्थाओं की जानकारी लेने को कहा गया है।
ई-केवाईसी और डीबीटी में भी समन्वय की जरूरत
बैठक में ई-केवाईसी और डीबीटी कार्य में तेजी लाने के लिए ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर, सीडीपीओ और जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को आपसी समन्वय से काम करने के निर्देश दिए गए।
सवाल सिर्फ लक्ष्य पूरा करने का नहीं, जमीनी व्यवस्था का भी
जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में सामने आए आंकड़े यह सवाल जरूर खड़ा करते हैं कि स्वास्थ्य योजनाओं के निर्धारित लक्ष्य और जमीनी स्तर पर उनकी वास्तविक प्रगति के बीच इतना अंतर क्यों है?
दस्तक अभियान में सिर्फ 14 प्रतिशत उपलब्धि, 2367 बच्चों का टीकाकरण ओवरड्यू होना और हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं के प्रबंधन में कई क्षेत्रों की कम प्रगति बताती है कि स्वास्थ्य विभाग को सिर्फ लक्ष्य तय करने के बजाय उनकी मैदानी निगरानी और समय पर क्रियान्वयन पर भी अधिक जोर देना होगा।
अब देखने वाली बात यह होगी कि कलेक्टर की नाराजगी और कार्रवाई की चेतावनी के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इन आंकड़ों को कितनी तेजी से सुधारते हैं और अगली समीक्षा में जमीनी स्थिति में कितना बदलाव दिखाई देता है।












