बालाघाट। | द इंडिया स्पीक्स डेस्क
मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले में आदिवासी बच्चों की मौत का मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है। गुरुवार 1 अक्टूबर को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी बिरसा विकासखंड के जगला गांव पहुंचे और बीमारी से बच्चों को खोने वाले बैगा आदिवासी परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने परिवारों से स्वास्थ्य सुविधाओं, रोजगार, शिक्षा, मुआवजे और वन अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत की तथा मामले को संसद में उठाने की बात कही।
मौतों के आंकड़े पर अलग-अलग दावे
बालाघाट के बैहर और बिरसा क्षेत्र में पिछले कुछ महीनों में आदिवासी बच्चों की मौत का मामला सामने आया है। प्रशासन की ओर से अब तक 32 बच्चों की मौत की पुष्टि किए जाने की रिपोर्ट है। वहीं कांग्रेस की ओर से मृत बच्चों की संख्या 43 होने का दावा किया गया है।
मौतों के अलग-अलग मामलों में मलेरिया, खसरा, कुपोषण, एनीमिया, डिहाइड्रेशन, सांस संबंधी परेशानी और अन्य संक्रमण जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का उल्लेख सामने आया है। उपलब्ध रिपोर्टों में सभी मौतों को किसी एक बीमारी से जोड़कर नहीं बताया गया है।
राहुल गांधी ने परिवारों से सुनी परेशानी
राहुल गांधी ने प्रभावित परिवारों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ शिक्षा और रोजगार की स्थिति पर सवाल उठाए। राहुल गांधी ने कहा कि प्रभावित आदिवासी परिवारों को उनके अधिकार और जरूरी सरकारी सुविधाएं मिलनी चाहिए तथा बच्चों की मौत का मामला संसद में उठाया जाएगा।
उन्होंने वन अधिकार कानून के तहत आदिवासी परिवारों को जमीन के अधिकार से जुड़े दस्तावेज देने, ग्रामीण रोजगार योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और सरकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई।
मुआवजे को लेकर भी सवाल
बच्चों की मौत के बाद प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिए जाने का मुद्दा भी राहुल गांधी ने उठाया। रिपोर्टों के अनुसार सरकार की ओर से प्रत्येक प्रभावित परिवार को 4 लाख रुपये मुआवजा जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है।
वहीं राहुल गांधी ने दावा किया कि करीब आधे प्रभावित परिवारों को अभी तक मुआवजा नहीं मिला है। ऐसे में कितने परिवारों को वास्तव में मुआवजा मिल चुका है, यह सरकारी रिकॉर्ड से स्पष्ट होना महत्वपूर्ण है।
सरकार की ओर से भी आया जवाब
राहुल गांधी के दौरे के बाद भाजपा नेताओं और मध्यप्रदेश सरकार की ओर से उनके आरोपों पर प्रतिक्रिया सामने आई। स्वास्थ्य मंत्री एवं उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने राहुल गांधी के दौरे को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया दी, जबकि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी कांग्रेस पर सवाल उठाए।
इस तरह बच्चों की मौत का मामला अब स्वास्थ्य व्यवस्था और आदिवासी कल्याण से जुड़े सवालों के साथ राजनीतिक बहस का भी केंद्र बन गया है।
हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है मामला
बालाघाट में बच्चों की मौत और स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़े सवालों को लेकर मामला मध्यप्रदेश हाईकोर्ट तक भी पहुंच चुका है। एक जनहित याचिका में आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं और बच्चों के इलाज को लेकर सवाल उठाए गए हैं। अदालत की ओर से राज्य सरकार से जवाब मांगे जाने की जानकारी सामने आई है।
बालाघाट के बैहर और बिरसा क्षेत्र में सामने आया यह मामला अब सिर्फ मौतों के आंकड़ों तक सीमित नहीं है। स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, कुपोषण, सरकारी योजनाओं का लाभ, मुआवजा और आदिवासी परिवारों के अधिकारों को लेकर उठे सवालों के जवाब इस मामले में आगे महत्वपूर्ण होंगे।










