अशोकनगर। मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिला अस्पताल की स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (SNCU) में एक दिन की नवजात बच्ची की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और नवजातों की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बच्ची के गले पर दबाव के निशान मिलने और मुंह से खून आने की जानकारी के बाद मामला संदिग्ध माना गया। पोस्टमार्टम में गला दबाने के संकेत सामने आने के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है।
जन्म के कुछ घंटों बाद SNCU में मौत
पुलिस के अनुसार बच्ची का जन्म 2 अक्टूबर की रात करीब 11:50 बजे चंदेरी क्षेत्र के सकरा गांव के एक परिवार में हुआ था। जन्म के बाद उसे अशोकनगर जिला अस्पताल की SNCU में भर्ती कराया गया था। अगले दिन 3 अक्टूबर को दोपहर करीब 3 से 4 बजे के बीच बच्ची मृत मिली। यानी जन्म के करीब 16 घंटे के भीतर उसकी मौत हो गई।
बच्ची के गले पर निशान और मुंह से खून आने की जानकारी सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस को सूचना दी। पोस्टमार्टम के दौरान गले पर दबाव के निशान पाए गए और रिपोर्ट में गला दबाने से मौत की पुष्टि होने की बात सामने आई है।
SNCU के अंदर CCTV नहीं, मां और दादी से पूछताछ
मामले में सबसे गंभीर सवाल अस्पताल की निगरानी व्यवस्था को लेकर उठ रहा है। रिपोर्टों के अनुसार SNCU के अंदर CCTV कैमरे नहीं लगे हैं। पुलिस अब अस्पताल के दूसरे हिस्सों में लगे कैमरों की फुटेज और अस्पताल के रिकॉर्ड के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बच्ची तक कौन-कौन पहुंचा था।
अधिकारियों के मुताबिक अस्पताल के रिकॉर्ड में बच्ची को देखने के लिए उसकी मां और दादी के पहुंचने की जानकारी सामने आई है। पुलिस दोनों से पूछताछ कर रही है। हालांकि अभी किसी को आरोपी घोषित नहीं किया गया है और जांच जारी है।
तीसरी बेटी थी नवजात, पुलिस हर पहलू की कर रही जांच
पुलिस के अनुसार नवजात बच्ची परिवार की तीसरी बेटी थी। इसी तथ्य के चलते जांच में यह पहलू भी देखा जा रहा है कि कहीं बच्ची की हत्या के पीछे लिंग आधारित पूर्वाग्रह या परिवार से जुड़ा कोई अन्य कारण तो नहीं था। फिलहाल इसका कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है और पुलिस साक्ष्यों तथा बयानों के आधार पर मामले की जांच कर रही है।
एक नवजात की मौत वह भी अस्पताल की ऐसी इकाई में, जहां बीमार और कमजोर नवजातों की विशेष निगरानी की जाती है, अपने आप में अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। यदि जांच में हत्या की पुष्टि होती है, तो यह सवाल और गंभीर हो जाता है कि प्रतिबंधित क्षेत्र में बच्ची तक कोई कैसे पहुंचा और वहां निगरानी की व्यवस्था कितनी प्रभावी थी।
फिलहाल पुलिस जांच जारी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट सहित अन्य साक्ष्यों के आधार पर मौत की पूरी परिस्थितियों को सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है।









