उज्जैन। | The India Speaks
सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण को लेकर व्यापारियों और प्रशासन के बीच विवाद गहराता नजर आ रहा है। महाकाल चौराहे से गुदरी चौराहा होते हुए गोपाल मंदिर तक प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण के विरोध में व्यापारी रहवासी महासंघ ने 12 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन बाजार बंद रखने का ऐलान किया है। व्यापारियों का आरोप है कि रविवार देर रात करीब एक बजे संबंधित भवनों पर निशान लगाए गए, जबकि उनसे पहले चर्चा करने का आश्वासन दिया गया था।
व्यापारियों के मुताबिक, सड़क के दोनों ओर चार-चार मीटर तक मार्किंग की गई है। उनका दावा है कि प्रस्तावित चौड़ीकरण से क्षेत्र के करीब 70 प्रतिशत व्यापारियों के प्रतिष्ठान पूरी तरह खत्म हो सकते हैं। इससे सैकड़ों परिवारों की आजीविका प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि, कितनी दुकानों और भवनों पर वास्तविक असर पड़ेगा, इसका आधिकारिक आंकड़ा सामने आना बाकी है।
रात में मार्किंग से नाराज व्यापारी, बाजार बंद का फैसला
सड़क चौड़ीकरण की योजना को लेकर व्यापारी पहले भी विरोध जता चुके हैं। व्यापारियों का कहना है कि टेंडर जारी होने के बाद उन्होंने अपनी चिंताओं से संबंधित जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया था। उन्हें चर्चा के माध्यम से समाधान निकालने का भरोसा मिला था, लेकिन इसके बावजूद देर रात भवनों पर निशान लगाए गए।
इसी के विरोध में व्यापारी रहवासी महासंघ की बैठक में 12 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन बाजार बंद रखने और चरणबद्ध तरीके से शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का निर्णय लिया गया। पाटनी बाजार, बर्तन बाजार, सराफा और गुदरी क्षेत्र के व्यापारियों ने भी इस विरोध का समर्थन किया है।
व्यापारियों का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण के नाम पर वर्षों से कारोबार कर रहे प्रतिष्ठानों के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो सकता है। उनका सवाल है कि जब इस योजना से लोगों की आजीविका प्रभावित होने की आशंका है, तो सभी संबंधित पक्षों को विश्वास में लेकर निर्णय क्यों नहीं लिया गया?
70 प्रतिशत दुकानों पर असर का दावा, प्रशासन की योजना पर सवाल
व्यापारी रहवासी महासंघ का दावा है कि प्रस्तावित चौड़ीकरण से क्षेत्र के लगभग 70 प्रतिशत व्यापारियों के प्रतिष्ठान पूरी तरह समाप्त हो सकते हैं। यदि यह दावा सही साबित होता है, तो इसका असर केवल दुकानदारों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इन प्रतिष्ठानों से जुड़े कर्मचारियों, परिवारों और स्थानीय कारोबार पर भी पड़ सकता है।
ऐसे में कई सवालों के जवाब जरूरी हैं। सड़क चौड़ीकरण के दायरे में कुल कितनी दुकानें और आवासीय भवन आ रहे हैं? कितने निर्माण आंशिक और कितने पूरी तरह प्रभावित होंगे? प्रभावित व्यापारियों के लिए मुआवजे, पुनर्वास या वैकल्पिक व्यापारिक व्यवस्था का कोई प्रावधान है या नहीं?
व्यापारियों की आशंकाओं और प्रशासन की वास्तविक योजना के बीच स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है। इन सवालों पर उज्जैन नगर निगम और जिला प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही परियोजना के प्रभाव का आकलन किया जा सकेगा।
यातायात सुधारने का विकल्प भी सुझा रहे व्यापारी
पाटनी बाजार व्यापारी एसोसिएशन से जुड़े व्यापारियों का कहना है कि क्षेत्र में यातायात की समस्या दूर करने के लिए सड़क चौड़ीकरण के अलावा अन्य विकल्पों पर भी विचार किया जाना चाहिए। उनका सुझाव है कि सड़क पर ई-रिक्शा की पार्किंग और यातायात संबंधी अव्यवस्थाओं को नियंत्रित करने से भी आवागमन में सुधार हो सकता है।
व्यापारियों का तर्क है कि किसी भी विकास परियोजना का उद्देश्य आम लोगों को बेहतर सुविधा देना होना चाहिए, लेकिन इसके साथ उन लोगों की आजीविका का भी ध्यान रखा जाना चाहिए जो पीढ़ियों से इन बाजारों में कारोबार कर रहे हैं।
अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन व्यापारियों के साथ बैठकर ऐसा समाधान निकाल पाएगा, जिससे यातायात व्यवस्था में सुधार के साथ प्रभावित दुकानदारों के हितों की भी रक्षा हो सके?
विकास की योजना और रोजी-रोटी के बीच समाधान जरूरी
उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत सड़क और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने की योजनाएं महत्वपूर्ण हैं। लेकिन इन योजनाओं के क्रियान्वयन में प्रभावित व्यापारियों और रहवासियों की चिंताओं का समाधान भी उतना ही जरूरी है।
व्यापारियों ने अनिश्चितकालीन बाजार बंद का फैसला लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर दी है। अब निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर हैं। क्या प्रभावित प्रतिष्ठानों की संख्या और नुकसान का स्पष्ट आकलन सार्वजनिक किया जाएगा? क्या व्यापारियों से औपचारिक चर्चा होगी? और क्या मुआवजे या वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर कोई ठोस योजना सामने आएगी?
इन सवालों के जवाब तय करेंगे कि सड़क चौड़ीकरण की यह योजना सहमति के साथ आगे बढ़ती है या व्यापारियों का विरोध और गहराता है।









