बड़वाह। | The India Speaks
खरगोन जिले के बड़वाह थाना क्षेत्र के ग्राम नवघाटखेड़ी में वर्ष 2022 में पेट्रोल पंप पर हुए जानलेवा हमले के मामले में मंडलेश्वर की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने हत्या और दंगा करने के मामले में 10 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। वहीं, तीन अन्य आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया। अदालत का यह फैसला 3 अक्टूबर 2026 को सामने आया।
पेट्रोल पंप पर हुआ था हमला, युवक की गई थी जान
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 13 मई 2022 को अनिल मांंगले अपने दोस्तों सुरेंद्र उर्फ कालू केवट और जितेश केवट के साथ नवघाटखेड़ी स्थित एक पेट्रोल पंप पर बाइक में पेट्रोल भरवाने पहुंचा था। तीनों वहां एक अन्य दोस्त का इंतजार कर रहे थे, तभी लोहे और प्लास्टिक के पाइप तथा लाठियों से लैस लोगों का एक समूह वहां पहुंचा।
अभियोजन के मुताबिक, हमलावरों ने तीनों पर हमला कर दिया। इस दौरान सुरेंद्र उर्फ कालू केवट गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे प्राथमिक उपचार के बाद इंदौर रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में उसकी मौत हो गई। हमले में अनिल मांंगले और जितेश केवट भी घायल हुए थे।
पुरानी रंजिश और नाव संचालन का विवाद आया सामने
अभियोजन पक्ष ने घटना के पीछे पुरानी पंचायत संबंधी रंजिश और नर्मदा नदी में नाव संचालन को लेकर विवाद को वजह बताया था। मामले में बड़वाह पुलिस ने विभिन्न धाराओं और अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच के बाद आरोपपत्र अदालत में पेश किया था।
मामले की सुनवाई विशेष न्यायालय में हुई। अदालत ने साक्ष्यों, चिकित्सकीय रिपोर्ट और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर 10 आरोपियों को दोषी ठहराया।
10 दोषियों को उम्रकैद, तीन को संदेह का लाभ
विशेष न्यायाधीश अमित रंजन समाधिया की अदालत ने प्रदीप, घनश्याम, अजय, राम, राम उर्फ रामचंद्र, दाऊ उर्फ मनोज, लक्की, देवेंद्र, रोहित प्रजापति और लेखराम केवट को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। दोषियों पर जुर्माना भी लगाया गया।
वहीं, गोलू उर्फ अनिल, जितेंद्र और बलराम उर्फ बल्लू को अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत के अनुसार, इन तीनों के खिलाफ आपराधिक साजिश का आरोप संदेह से परे साबित नहीं हो सका।
चार साल से अधिक समय तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद आए इस फैसले में अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की भूमिका का निर्धारण किया। मामले में 10 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई, जबकि तीन अन्य आरोपियों को बरी कर दिया गया।









