बड़वाह। लोकेश कोचले|द इंडिया स्पीक्स
जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की समीक्षा बैठक में सामने आए आंकड़ों ने बड़वाह ब्लॉक की स्वास्थ्य सेवाओं और मैदानी मॉनिटरिंग को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकारी समीक्षा में बड़वाह को दो महत्वपूर्ण स्वास्थ्य मानकों में अपेक्षाकृत कम प्रगति वाले क्षेत्रों में शामिल किया गया है। एक ओर बड़वाह में टीकाकरण के लिए ओवरड्यू बच्चों की संख्या अधिक पाई गई, वहीं दूसरी ओर हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं के उपचार एवं प्रबंधन में भी बड़वाह की प्रगति अपेक्षाकृत कम रही।
कलेक्टर गुरु प्रसाद की अध्यक्षता में हुई जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में जिलेभर की स्वास्थ्य योजनाओं और कार्यक्रमों की समीक्षा की गई। बैठक में सामने आई स्थिति के बाद अधिकारियों को शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने और चिन्हित मामलों पर विशेष निगरानी के निर्देश दिए गए।
बड़वाह में टीकाकरण की निगरानी पर सवाल
राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम की समीक्षा के दौरान सामने आया कि पिछले माह तक जिले में 2367 बच्चे टीकाकरण के लिए ओवरड्यू थे। इनमें झिरन्या और बड़वाह में ओवरड्यू बच्चों की संख्या अधिक पाए जाने की बात सरकारी समीक्षा में सामने आई।
कलेक्टर ने ऐसे बच्चों की नामजद सूची तैयार कर प्रत्येक बच्चे पर व्यक्तिगत रूप से काम करने तथा शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
लेकिन सवाल यह है कि जब बच्चों के नियमित टीकाकरण की निगरानी के लिए स्वास्थ्य विभाग का मैदानी अमला मौजूद है, तो बड़वाह में ओवरड्यू बच्चों की संख्या अधिक होने की स्थिति आखिर बनी कैसे?
क्या बच्चों की समय पर पहचान नहीं हो पाई? क्या टीकाकरण सत्रों की मॉनिटरिंग में कमी रही? या फिर बच्चों के परिजनों तक लगातार फॉलोअप नहीं पहुंच पाया?
इन सवालों का जवाब बड़वाह ब्लॉक स्वास्थ्य विभाग को देना होगा।
हाईरिस्क गर्भवतियों के प्रबंधन में भी बड़वाह पीछे
बड़वाह के लिए इससे भी अधिक संवेदनशील मुद्दा हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं से जुड़ा है। जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं के उपचार और प्रबंधन की समीक्षा के दौरान बड़वाह को उन क्षेत्रों में शामिल किया गया, जहां अपेक्षाकृत कम प्रगति पाई गई।
कलेक्टर ने ऐसे मामलों में शत-प्रतिशत प्रबंधन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। वहीं गंभीर एनीमिया से पीड़ित गर्भवती महिलाओं को आवश्यकता के अनुसार ब्लड ट्रांसफ्यूजन कराने तथा एनीमिया नियंत्रण के लिए प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए।
गर्भवती महिलाओं के मामले में समय पर पहचान, नियमित जांच, उपचार और आवश्यकता पड़ने पर रेफरल बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में बड़वाह में हाईरिस्क गर्भवतियों के प्रबंधन में अपेक्षाकृत कम प्रगति सामने आना स्वास्थ्य विभाग की मैदानी मॉनिटरिंग को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
एक ही समीक्षा में दो महत्वपूर्ण स्वास्थ्य मानकों पर बड़वाह
सरकारी समीक्षा में एक ही बैठक के दौरान बड़वाह का नाम दो महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सामने आया—टीकाकरण में ओवरड्यू बच्चों की अधिक संख्या और हाईरिस्क गर्भवतियों के प्रबंधन में अपेक्षाकृत कम प्रगति।
ऐसे में मामला केवल लक्ष्य पूरा करने तक सीमित नहीं रह जाता। सवाल यह भी है कि बड़वाह ब्लॉक में स्वास्थ्य योजनाओं की मॉनिटरिंग किस स्तर पर हो रही है और कमियों की जिम्मेदारी किस स्तर पर तय की जा रही है।
ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर से लेकर मैदानी स्वास्थ्य अमले तक की जिम्मेदारी है कि पात्र बच्चों का समय पर टीकाकरण हो, गर्भवती महिलाओं की नियमित निगरानी की जाए और हाईरिस्क मामलों की पहचान के बाद समय पर उपचार एवं रेफरल की व्यवस्था सुनिश्चित हो।
सिर्फ निर्देशों से बदलेगी बड़वाह की तस्वीर?
स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठकों में शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के निर्देश लगातार दिए जाते हैं, लेकिन असली परीक्षा मैदानी स्तर पर होती है।
बड़वाह में ओवरड्यू टीकाकरण और हाईरिस्क गर्भवतियों के प्रबंधन में अपेक्षाकृत कम प्रगति सामने आने के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ब्लॉक स्वास्थ्य विभाग इन कमियों को दूर करने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।
बड़वाह के लोगों के लिए सवाल सीधा है—अगर सरकारी समीक्षा में ही ब्लॉक का प्रदर्शन इन महत्वपूर्ण स्वास्थ्य मानकों पर अपेक्षाकृत कम सामने आ रहा है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है और सुधार की निगरानी कौन करेगा?
अब अगली समीक्षा में बड़वाह की स्थिति कितनी सुधरती है, यह देखने वाली बात होगी। क्योंकि स्वास्थ्य सेवाओं में सिर्फ लक्ष्य तय करना पर्याप्त नहीं है। हर बच्चे का समय पर टीकाकरण और हर हाईरिस्क गर्भवती तक समय पर जांच, उपचार और आवश्यक स्वास्थ्य सुविधा पहुंचना ही जमीनी सफलता का वास्तविक पैमाना है।












