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सताजना/ खरगोन। आकाश बिर्ला। द इंडिया स्पीक्स

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी सताजना फाटे से नीलकंठ तक की सड़क, गांव के लिए विकास की सौगात नहीं, बल्कि बीमारियों और दुर्घटनाओं का सबब बन गई है। सड़क तो बन गई, पर ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों ने साइड शोल्डर और जल निकासी जैसे मूलभूत काम अधूरे छोड़ दिए। ‘द इंडिया स्पीक्स’ की पड़ताल में सामने आया है कि अधूरे और दोषपूर्ण निर्माण के कारण ग्रामीणों का जीवन दूभर हो गया है।

​सड़क बनी, पर ‘साइड सोल्डर’ भूले जिम्मेदार: हर कदम पर गंदा पानी

​किसी भी क्षेत्र की सड़कें उसके विकास की स्थिति को दर्शाती हैं, पर सताजना की यह सड़क सिर्फ लापरवाही को दर्शा रही है।

  • साइड शोल्डर गायब: सताजना फाटे से नीलकंठ तक बनी डामर सड़क के किनारे साइड शोल्डर (किनारे को मजबूत करने वाली मिट्टी या सामग्री) भरे ही नहीं गए हैं।
  • निकासी की बड़ी चूक: सबसे गंभीर समस्या जल निकासी का अभाव है। नाले के पास पानी निकासी की व्यवस्था न होने और नाली का ढलान गलत बनाने के कारण सारा गंदा पानी सड़क पर ही जमा हो रहा है।
  • कीचड़ का आतंक: वाहन जब इस जमा पानी और कीचड़ से गुजरते हैं, तो गंदा पानी उछलकर राहगीरों और स्कूल जाने वाले बच्चों पर उड़ता है। बाइक चालक अक्सर फिसलते हैं।

​टूटी सीसी रोड और जानलेवा गड्ढे: ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा खामियाजा

​डामर रोड से आगे गांव के अंदर बना सीमेंट कंक्रीट (CC) रोड भी पूरी तरह उखड़ चुका है।

  • गड्ढों में तब्दील: यह सीसी रोड अब छोटे-छोटे पोखरों में तब्दील हो गया है, जिसमें बारिश और घरों का गंदा पानी भरा रहता है। मयाराम वर्मा के घर से रेवा गुर्जर भवन तक की मरम्मत नहीं हुई है और सड़क पर दो-दो फीट के गहरे गड्ढे बन गए हैं।
  • बीमारियों का खतरा: सड़क पर जमा गंदगी के कारण मच्छर पनप रहे हैं, जिससे बीमारियों का खतरा बना हुआ है। सरपंच कड़वा अहिरवाल ने सफाई करवाने की बात तो कही, लेकिन इसके लिए गलत नाली ढलान को जिम्मेदार ठहराया।
  • अस्थायी समाधान: ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायत करने पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी केवल गंदे पानी के पास पाउडर डालने का निर्देश देते हैं, जो समस्या का स्थाई निराकरण नहीं है।

​सीएम हेल्पलाइन भी मौन: अधिकारियों की संवेदनहीनता

​गांव के देवेंद्र बिरला और चंदूलाल गुलिया ने बताया कि उन्होंने पिछले कई महीनों से सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत की है, पर अब तक कोई समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों ने सीधे-सीधे ठेकेदार और अधिकारियों की लापरवाही को इन बदतर हालातों का जिम्मेदार ठहराया है।

​जब इस संबंध में सब इंजीनियर रूपेश मंडलोई से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने बात करना भी उचित नहीं समझा। यह सरकारी तंत्र की उदासीनता और जवाबदेही से बचने की प्रवृत्ति को उजागर करता है।

​जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो होगा उग्र आंदोलन

​बारिश में बढ़ी परेशानियों से तंग आकर ग्रामीणों ने चेतावनी दी है। उनका कहना है कि यदि जल्द ही साइड शोल्डर भरने, नाली का ढलान सही करने और टूटी सीसी रोड की मरम्मत कर इस समस्या का स्थाई निराकरण नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे।

सवाल यह है: क्या अधिकारी ग्रामीणों को इस गंदगी और जोखिम भरी जिंदगी से मुक्ति दिलाएंगे, या उन्हें सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ेगा?

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