दुर्लभ बीमारी SMA Type-2 से जूझ रही इंदौर की 3.5 वर्षीय अनिका, इलाज के लिए चाहिए दुनिया की सबसे महंगी जीन थेरेपी में से एक
इंदौर। The India Speaks Desk
इंदौर की साढ़े तीन वर्षीय मासूम अनिका शर्मा की जिंदगी बचाने की लड़ाई अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट तक पहुंच गई है। दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA Type-2) से पीड़ित अनिका के इलाज के लिए करीब 9 करोड़ रुपये की लागत वाला जीवनरक्षक इंजेक्शन आवश्यक है। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार से तीखे सवाल पूछते हुए संवेदनशील टिप्पणी की कि “क्या यह बच्ची भी राज्य की लाड़ली बहना नहीं है?”
क्या है अनिका की बीमारी?
अनिका इंदौर के द्वारकापुरी क्षेत्र की निवासी है और वह स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA Type-2) नामक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित है। यह एक गंभीर आनुवंशिक न्यूरो-मस्कुलर रोग है, जिसमें शरीर की मांसपेशियां धीरे-धीरे कमजोर होती जाती हैं। समय के साथ रोगी के चलने-फिरने, बैठने, खाने और सांस लेने तक की क्षमता प्रभावित होने लगती है।
परिजनों के अनुसार अनिका की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है और वह पिछले कई महीनों से केवल तरल आहार पर निर्भर है।
9 करोड़ रुपये का इंजेक्शन क्यों जरूरी?
डॉक्टरों ने अनिका के इलाज के लिए जीन थेरेपी आधारित दवा “जोलजेनस्मा” (Zolgensma) की आवश्यकता बताई है। इसे दुनिया की सबसे महंगी दवाओं में गिना जाता है। यह एक बार दिया जाने वाला इंजेक्शन है, जिसकी कीमत लगभग 9 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर यह उपचार मिलने से रोग की प्रगति को काफी हद तक रोका जा सकता है और मरीज के जीवन की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है।
समाज ने बढ़ाया मदद का हाथ, फिर भी अधूरी है रकम
अनिका के परिवार ने सामाजिक संगठनों, दानदाताओं और आम नागरिकों की मदद से बड़ी राशि जुटाने का प्रयास किया है। परिवार के अनुसार अब तक करीब 8 करोड़ रुपये की व्यवस्था हो चुकी है, लेकिन इलाज के लिए अभी भी आवश्यक राशि पूरी नहीं हो पाई है।
इसी कारण परिवार ने सरकार से आर्थिक सहायता की मांग करते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
हाईकोर्ट की भावुक टिप्पणी ने खींचा ध्यान
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष के अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि यदि सरकार विशेष सहायता प्रदान करे तो बच्ची की जान बचाई जा सकती है। इस दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से सवाल किया कि जब विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर सहायता दी जा सकती है, तो एक मासूम बच्ची के जीवनरक्षक इलाज के लिए विशेष व्यवस्था क्यों नहीं की जा सकती।
सुनवाई के दौरान अदालत की यह टिप्पणी विशेष रूप से चर्चा में रही—
“क्या यह बच्ची भी लाड़ली बहना नहीं है?”
22 जून को होगी अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने फिलहाल कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया है। मामले की अगली सुनवाई 22 जून को निर्धारित की गई है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य और केंद्र सरकार इस मामले में क्या रुख अपनाती हैं और अनिका के इलाज के लिए आर्थिक सहायता का कोई रास्ता निकल पाता है या नहीं।
दुर्लभ बीमारियों के इलाज पर बड़ा सवाल
अनिका का मामला केवल एक बच्ची के इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश में दुर्लभ बीमारियों के महंगे उपचार, स्वास्थ्य नीतियों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के सामने आने वाली चुनौतियों पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। यह मामला उन हजारों परिवारों की पीड़ा को भी सामने लाता है जो गंभीर बीमारियों के इलाज और भारी खर्च के बीच संघर्ष कर रहे हैं।











