इंदौर-इच्छापुर हाईवे पर सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुली, NHAI की निगरानी पर गंभीर सवाल
बाईग्राम/चोरल। लोकेश कोचले| The India Speaks
इंदौर-इच्छापुर नेशनल हाईवे पर चोरल घाट क्षेत्र में बन रही निर्माणाधीन टनल एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जिस टनल परियोजना में पिछले वर्ष दो मजदूरों की जान चली गई थी, उसी टनल के भीतर आज आम लोग बाइक लेकर धड़ल्ले से गुजर रहे हैं। सबसे हैरानी की बात यह है कि यह सब संबंधित एजेंसियों और जिम्मेदार अधिकारियों की आंखों के सामने हो रहा है।
The India Speaks की टीम जब मौके पर पहुंची तो वहां का नजारा चौंकाने वाला था। टनल का एक सिरा बंद होने के बावजूद लोग पत्थरों, मलबे और अवरोधकों के बीच से अपने दोपहिया वाहन निकालकर अंदर प्रवेश कर रहे थे। कई बाइक सवार अपने साथ महिलाओं और छोटे बच्चों को लेकर भी इस जोखिम भरे रास्ते का इस्तेमाल करते दिखाई दिए।
मौत का सबक भी भूल गए जिम्मेदार?
25 जून 2025 को इसी निर्माणाधीन टनल के एक हिस्से के ढहने से दो मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई थी। हादसे में झारखंड निवासी विकास राय की मौके पर मौत हो गई थी जबकि सिंगरौली निवासी लालजी कौल ने अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया था। प्रारंभिक जांच में भारी बारिश और सुरक्षा संबंधी सवाल सामने आए थे।
इतने बड़े हादसे के बाद उम्मीद थी कि परियोजना क्षेत्र को पूरी तरह प्रतिबंधित रखा जाएगा और सुरक्षा व्यवस्था अभेद्य बनाई जाएगी। लेकिन वर्तमान हालात देखकर लगता है कि हादसे से किसी ने कोई सबक नहीं लिया ।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब टनल के भीतर निर्माण कार्य जारी है, तब किसी अनधिकृत व्यक्ति को वहां पहुंचने ही क्यों दिया जा रहा है?
NHAI ने कहा – “मैं देखता हूं”
जब The India Speaks ने इस मामले में NHAI के प्रोजेक्ट डायरेक्टर प्रवीण यादव से चर्चा की तो उनका जवाब था — “मैं देखता हूं।”
लेकिन सवाल यह है कि क्या कार्रवाई किसी नए हादसे के बाद होगी? क्या दो मौतें पर्याप्त नहीं थीं कि सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह सख्त किया जाता?
निर्माणाधीन टनल के भीतर भारी मशीनें, मलबा, ढीली चट्टानें और लगातार चल रहा निर्माण कार्य किसी भी समय जानलेवा साबित हो सकता है। इसके बावजूद लोगों का वहां से गुजरना और जिम्मेदार एजेंसियों का मूकदर्शक बने रहना गंभीर लापरवाही की ओर इशारा करता है।
यदि कल कोई बड़ा हादसा होता है तो जिम्मेदारी किसकी होगी? उन लोगों की जो शॉर्टकट तलाश रहे हैं, या उन अधिकारियों की जिनकी जिम्मेदारी ही सुरक्षा सुनिश्चित करना है?
फिलहाल चोरल की यह निर्माणाधीन टनल विकास का प्रतीक कम और प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण अधिक नजर आ रही है।












