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शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं, अब स्टिंग ऑपरेशन के बाद उठे बड़े सवाल; आबकारी विभाग ने जांच का दिया आश्वासन

करही (खरगोन)। प्रभु रंसोरे | The India Speaks

खरगोन जिले के करही स्थित शासकीय शराब दुकान एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में आ गई है। लंबे समय से स्थानीय उपभोक्ताओं द्वारा लगाए जा रहे ओवररेटिंग के आरोप अब एक स्टिंग ऑपरेशन के बाद और अधिक चर्चा का विषय बन गए हैं। आरोप है कि दुकान पर शराब की बोतलों पर अंकित अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) से अधिक राशि वसूली जा रही है और यह सिलसिला लंबे समय से बिना किसी प्रभावी रोक-टोक के जारी है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि उपभोक्ताओं की शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं और मामला मुख्यमंत्री हेल्पलाइन तक पहुंच चुका था, तो अब तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

ग्राहक बनकर पहुंचे पत्रकार, सामने आए कथित सबूत

मामले की सच्चाई जानने के लिए किए गए एक स्टिंग ऑपरेशन में पत्रकार ने ग्राहक बनकर शराब खरीदी। इस दौरान कथित तौर पर दुकान कर्मचारियों द्वारा बोतल पर अंकित MRP से अधिक कीमत वसूले जाने का मामला सामने आया।

स्टिंग ऑपरेशन के दौरान पत्रकार द्वारा “प्रेसिडेंट” नामक बीयर की एक बोतल खरीदी गई। आरोप है कि उक्त बोतल पर अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) 167 रुपये अंकित था, लेकिन दुकान कर्मचारियों द्वारा 180 रुपये की राशि वसूली गई। बताया जाता है कि यह भुगतान UPI के माध्यम से किया गया, जिससे लेन-देन का डिजिटल रिकॉर्ड भी उपलब्ध है।

यदि जांच में यह तथ्य सही पाए जाते हैं, तो यह निर्धारित मूल्य से अधिक राशि वसूलने का स्पष्ट मामला माना जा सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल एक उदाहरण है, जबकि लंबे समय से ग्राहकों द्वारा इसी प्रकार की शिकायतें की जाती रही हैं।

ग्राहकों का आरोप – वर्षों से चल रहा है अतिरिक्त वसूली का खेल

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि दुकान पर अतिरिक्त राशि मांगना आम बात हो गई है। कई ग्राहकों का आरोप है कि निर्धारित मूल्य पर शराब देने की बात करने पर विवाद की स्थिति तक बन जाती है।

लोगों का कहना है कि यदि सरकारी नियंत्रण वाली शराब दुकानों पर ही नियमों की अनदेखी होगी तो आम उपभोक्ता न्याय की उम्मीद किससे करेगा।

CM हेल्पलाइन तक पहुंचीं शिकायतें, फिर भी नहीं दिखी ठोस कार्रवाई

क्षेत्रीय नागरिकों का दावा है कि इस विषय में कई बार मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और संबंधित विभागों में शिकायतें दर्ज कराई गईं। लेकिन शिकायतकर्ताओं के अनुसार अब तक ऐसी कोई कार्रवाई नहीं हुई जिससे जनता को यह भरोसा हो सके कि शिकायतों को गंभीरता से लिया गया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार शिकायतों के बावजूद यदि स्थिति जस की तस बनी हुई है, तो यह निगरानी व्यवस्था और जवाबदेही दोनों पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

राजनीतिक संरक्षण की चर्चाएं, लेकिन पुष्टि नहीं

मामले को लेकर क्षेत्र में यह चर्चा भी है कि शराब कारोबार को कथित रूप से कुछ प्रभावशाली लोगों का संरक्षण प्राप्त है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और किसी भी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की कोई आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

फिर भी लगातार शिकायतों और कथित अनियमितताओं के बावजूद कार्रवाई का अभाव लोगों के मन में कई सवाल जरूर खड़े कर रहा है।

जिला आबकारी अधिकारी ने उपनिरीक्षक से संपर्क करने को कहा

जब इस संबंध में जिला आबकारी अधिकारी निधि शर्मा से संपर्क किया गया तो उन्होंने मामले की विस्तृत जानकारी के लिए आबकारी उपनिरीक्षक देवराज नगीना से चर्चा करने की बात कही।

“करही की शिकायतों की भी होगी जांच” – देवराज नगीना

आबकारी उपनिरीक्षक देवराज नगीना ने The India Speaks से चर्चा में बताया कि विभाग ओवररेटिंग के मामलों को गंभीरता से ले रहा है।

“फिलहाल गवला, छोटी खरगोन और पिपलिया क्षेत्र में ओवररेटिंग संबंधी मामलों में लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई कर प्रस्ताव उच्च कार्यालय को भेजे जा चुके हैं। करही क्षेत्र से भी लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही हैं। शिकायतों की जांच कर नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।”

उन्होंने यह भी संकेत दिए कि विभाग को करही क्षेत्र से लगातार शिकायतें मिल रही हैं और मामले की जांच जल्द शुरू की जाएगी।

अब सवालों के घेरे में पूरी व्यवस्था

करही शराब दुकान से जुड़े आरोप केवल एक दुकान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह पूरे निगरानी तंत्र की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़ा करते हैं।

  • यदि ओवररेटिंग हो रही थी तो नियमित निरीक्षण में यह क्यों नहीं पकड़ी गई?
  • यदि शिकायतें लगातार आ रही थीं तो कार्रवाई में देरी क्यों हुई?
  • क्या ग्राहकों से वसूली गई अतिरिक्त राशि की जांच होगी?
  • क्या डिजिटल भुगतान रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज की जांच की जाएगी?
  • दोषी पाए जाने पर क्या लाइसेंस निरस्तीकरण जैसी कार्रवाई करही में भी होगी?

इन सवालों के जवाब अब जिला प्रशासन और आबकारी विभाग को देने होंगे।

जनता को कार्रवाई का इंतजार

स्टिंग ऑपरेशन के बाद सामने आए आरोपों और विभागीय प्रतिक्रिया ने करही की शासकीय शराब दुकान की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच कितनी निष्पक्ष और पारदर्शी होती है तथा क्या दोषियों के खिलाफ वास्तव में कोई ठोस कार्रवाई की जाती है।

यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला केवल ओवररेटिंग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उपभोक्ता अधिकारों और विभागीय जवाबदेही से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा बन सकता है।

फिलहाल करही की जनता प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार कर रही है और उम्मीद कर रही है कि इस बार शिकायतें केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहेंगी।

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