पेपर लीक रोकने के सरकारी फैसले पर Telegram संस्थापक की तीखी प्रतिक्रिया, कहा- असली दोषियों पर नहीं पड़ा असर
नई दिल्ली। The India Speaks Desk
NEET-UG परीक्षा को लेकर देशभर में चल रही सख्ती के बीच केंद्र सरकार द्वारा Telegram पर 22 जून तक लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म Telegram के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पावेल ड्यूरोव ने इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि यह कदम उन लोगों के खिलाफ नहीं गया जिन्होंने परीक्षा सामग्री लीक की, बल्कि इससे भारत के करोड़ों सामान्य उपयोगकर्ताओं को परेशानी उठानी पड़ रही है।
ड्यूरोव ने अपने बयान में कहा कि भारत में Telegram का उपयोग करने वाले लगभग 15 करोड़ लोगों को इस फैसले का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। उनके अनुसार परीक्षा से जुड़ी अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों पर इसका कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ा, क्योंकि ऐसे नेटवर्क अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर स्थानांतरित हो गए हैं।
NEET परीक्षा को लेकर बढ़ी सख्ती
हाल के वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और फर्जीवाड़े के मामलों ने सरकार और परीक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ाई है। इसी कड़ी में NEET-UG परीक्षा के दौरान सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स की निगरानी को और कड़ा किया गया है।
सरकारी एजेंसियों का मानना है कि Telegram के कुछ चैनलों और समूहों का उपयोग कथित रूप से परीक्षा सामग्री साझा करने और भ्रामक जानकारी फैलाने के लिए किया जा रहा था। इसी कारण एहतियाती कदम के रूप में प्लेटफॉर्म पर अस्थायी रोक लगाने का निर्णय लिया गया।
ड्यूरोव बोले- “समस्या का समाधान नहीं”
पावेल ड्यूरोव ने अपने बयान में कहा कि किसी एक प्लेटफॉर्म को बंद कर देने से समस्या समाप्त नहीं होती। उन्होंने तर्क दिया कि डिजिटल दुनिया में अवैध गतिविधियों में शामिल लोग आसानी से अन्य ऐप्स और माध्यमों का उपयोग करने लगते हैं, जबकि सामान्य उपयोगकर्ताओं को संचार और सूचना के आदान-प्रदान में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने इस निर्णय को “बड़ी भूल” बताते हुए कहा कि वास्तविक समाधान तकनीकी निगरानी, लक्षित कार्रवाई और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कदमों में है, न कि पूरे प्लेटफॉर्म को बंद करने में।
लाखों छात्रों और अभिभावकों की नजर
NEET-UG देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में से एक है, जिसमें हर वर्ष लाखों छात्र शामिल होते हैं। परीक्षा की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखना सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
Telegram पर लगी अस्थायी रोक और उस पर कंपनी की प्रतिक्रिया ने डिजिटल अधिकारों, परीक्षा सुरक्षा और सरकारी हस्तक्षेप को लेकर नई बहस को जन्म दे दिया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि 22 जून के बाद सरकार इस प्रतिबंध को हटाती है या आगे भी कोई नया कदम उठाती है।












