बुद्धिजीवियों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने रखे अपने विचार, सुझावों के आधार पर तैयार होगा यूसीसी का मसौदा
खरगोन। लोकेश कोचले| The India Speaks
समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर प्रदेशभर में चल रही जनपरामर्श प्रक्रिया के तहत शुक्रवार को खरगोन में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। शासकीय प्रधानमंत्री एक्सीलेंस महाविद्यालय में आयोजित इस बैठक में विभिन्न समुदायों, सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों, बुद्धिजीवियों और नागरिकों ने भाग लेकर अपने विचार और सुझाव प्रस्तुत किए।
बैठक का आयोजन समान नागरिक संहिता के अध्ययन एवं परीक्षण के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति द्वारा किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता समिति के सदस्य श्री गोपाल शर्मा एवं डॉ. शोभा पैठनकर ने की।
बैठक में जिले के विभिन्न वर्गों और समुदायों के प्रतिनिधियों ने भागीदारी की। इसमें सामाजिक कार्यकर्ता, अधिवक्ता, पत्रकार, महिला प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि और विभिन्न संगठनों के सदस्य शामिल रहे।
भाजपा, कांग्रेस, शिवसेना सहित अनेक राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखे। इसके अलावा नगर पालिका परिषद, मानव अधिकार आयोग, पत्रकार संघ, बाल कल्याण समिति, किशोर न्याय बोर्ड तथा जिला प्रशासन के अधिकारियों ने भी चर्चा में भाग लिया।
महिलाओं के अधिकारों से लेकर धार्मिक परंपराओं तक हुई चर्चा
बैठक के दौरान समान नागरिक संहिता के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत मंथन किया गया। विशेष रूप से महिलाओं के अधिकार, लैंगिक समानता, विवाह एवं तलाक संबंधी प्रावधान, संपत्ति में अधिकार, दत्तक ग्रहण, धार्मिक मान्यताओं की सुरक्षा तथा आदिवासी समाज की परंपराओं जैसे विषयों पर गंभीर चर्चा हुई।
प्रतिभागियों ने अपने अनुभवों और सामाजिक दृष्टिकोण के आधार पर सुझाव प्रस्तुत किए, जिन्हें समिति द्वारा दर्ज किया गया।
बैठक को संबोधित करते हुए समिति सदस्य श्री गोपाल शर्मा ने कहा कि समान नागरिक संहिता का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, संपत्ति के उत्तराधिकार और दत्तक ग्रहण जैसे नागरिक विषयों पर समान कानून की संभावना का अध्ययन और परीक्षण करना है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में आयोजित जनपरामर्श बैठकों का उद्देश्य नागरिकों की राय और सुझाव एकत्रित करना है, ताकि कानून निर्माण की प्रक्रिया अधिक व्यापक और सहभागी बन सके।
पक्ष और विपक्ष दोनों की राय आई सामने
बैठक में कई वक्ताओं ने समान नागरिक संहिता को महिलाओं के सशक्तिकरण, समान अधिकारों की स्थापना और “एक देश–एक कानून” की अवधारणा को मजबूत करने वाला कदम बताया।
वहीं दूसरी ओर कुछ वक्ताओं ने धार्मिक स्वतंत्रता, सामाजिक विविधता, पारंपरिक व्यवस्थाओं और वर्तमान सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों को ध्यान में रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। कुछ प्रतिभागियों ने आशंका व्यक्त की कि कानून निर्माण के दौरान विभिन्न समुदायों की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं का संरक्षण सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
आदिवासी समाज को समान नागरिक संहिता के दायरे से अलग रखने अथवा शामिल करने को लेकर भी बैठक में विभिन्न मत सामने आए।
सुझावों के आधार पर तैयार होगा मसौदा
बैठक के समापन अवसर पर समिति सदस्य डॉ. शोभा पैठनकर ने कहा कि जनपरामर्श प्रक्रिया के दौरान प्राप्त सभी सुझावों का गंभीरता से परीक्षण किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि विभिन्न जिलों से प्राप्त सुझावों और विचारों के आधार पर कानून का प्रारूप तैयार कर विधि विभाग को भेजा जाएगा। इसके बाद आवश्यक संवैधानिक और विधायी प्रक्रिया के तहत प्रस्ताव विधानसभा में प्रस्तुत किया जाएगा।
समिति ने नागरिकों से अधिक से अधिक संख्या में जनपरामर्श प्रक्रिया में भाग लेने और अपने सुझाव देने की अपील की। अधिकारियों का मानना है कि व्यापक जनभागीदारी से तैयार होने वाला कोई भी कानून समाज के विभिन्न वर्गों की अपेक्षाओं और आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित कर सकेगा।
खरगोन में आयोजित यह बैठक समान नागरिक संहिता पर प्रदेश स्तर पर चल रहे विमर्श का महत्वपूर्ण हिस्सा रही, जिसमें समर्थन और विरोध दोनों पक्षों के विचार खुलकर सामने आए।












