नर्मदा किनारे बन रहे घाटों में कथित लापरवाही उजागर, NVDA अधिकारियों ने कैमरे पर जवाब देने से किया इंकार
बड़वाह। The India Speaks Desk
आगामी सिंहस्थ पर्व को देखते हुए बड़वाह क्षेत्र में नर्मदा किनारे करोड़ों रुपए की लागत से घाट निर्माण कार्य तेज़ी से किए जा रहे हैं, लेकिन इन निर्माण कार्यों की गुणवत्ता अब सवालों के घेरे में आ गई है। The India Speaks की टीम जब मौके पर पहुंची तो निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।
मोरटक्का की ओर नर्मदा किनारे बनाए जा रहे घाट में निर्माण के दौरान रेती की जगह कथित तौर पर चूरी का इस्तेमाल किया जा रहा था। टीम द्वारा मौके पर वीडियो भी बनाया गया। पूछताछ करने पर फ्यूरी ऑपरेटर ने बताया कि रेती के ढेर के सामने चूरी का डम्पर खाली हो जाने और रेती लेने में परेशानी आने के कारण फिलहाल चूरी का उपयोग किया जा रहा है।
NVDA SDO ने लगाई फटकार, फिर भी मौके पर नहीं था विभागीय अमला
जब इस पूरे मामले को लेकर The India Speaks ने NVDA के SDO से सवाल किए तो उन्होंने निर्माण एजेंसी के इंजीनियर को तत्काल फटकार लगाई और रेती के लिए रास्ता साफ करवाने के निर्देश दिए।
हालांकि, हैरानी की बात यह रही कि करोड़ों की लागत से चल रहे इस निर्माण स्थल पर NVDA का कोई भी कर्मचारी मौजूद नहीं मिला।
“निर्माण एजेंसी को बिना रेती से बनाई गई वाल तोड़कर दोबारा बनाने के निर्देश दिए गए हैं।”
19 करोड़ के घाट निर्माण पर उठे भ्रष्टाचार के सवाल
स्थानीय सूत्रों के अनुसार मोरटक्का की तरफ बनने वाले इस घाट की अनुमानित लागत करीब 19 करोड़ रुपए बताई जा रही है। लेकिन ग्राउंड जीरो पर सामने आई यह लापरवाही अब NVDA और निर्माण एजेंसी दोनों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है।
मामले में जब अधिकारियों से कैमरे पर प्रतिक्रिया मांगी गई तो NVDA अधिकारियों ने बाइट देने से साफ इंकार कर दिया। वहीं निर्माण एजेंसी भी सवालों से बचती नजर आई।
बिना बोर्ड, बिना निगरानी चल रहा निर्माण कार्य
निर्माण स्थल पर विभाग की ओर से परियोजना संबंधी कोई बोर्ड भी नहीं लगाया गया है। इतना ही नहीं, इस्तेमाल किए जा रहे मैटेरियल की गुणवत्ता जांच को लेकर भी कोई व्यवस्था मौके पर दिखाई नहीं दी।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि मौके पर मौजूद रेती भी बिना किसी उचित जांच के इस्तेमाल की जा रही है और संबंधित विभाग पूरे मामले में जवाबदेही से बच रहा है।
स्थानीय लोगों ने लगाए भ्रष्टाचार के आरोप
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सिंहस्थ जैसे बड़े धार्मिक आयोजन के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन निर्माण कार्य में गुणवत्ता और पारदर्शिता दोनों पर गंभीर सवाल हैं। लोगों ने आरोप लगाया कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो यह घाट भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ सकते हैं।
“करोड़ों की लागत से बन रहे घाटों में अगर अभी से इस तरह की लापरवाही हो रही है तो भविष्य में हादसों की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।” — स्थानीय नागरिक











