📢 अपने क्षेत्र से जुड़ी भ्रष्टाचार की खबरे या विज्ञापन देने के लिए संपर्क करे
📞 7772828778 | 📩 Email: editor@theindiaspeaks.com

2023 की तस्वीर में दिख रही पुलिया, 2026 के सरकारी पत्र ने मानी जलभराव की समस्या, फिर भी नहीं हुआ स्थायी समाधान

बड़वाह। लोकेश कोचले। The India Speaks Desk

बड़वाह में विकास की नई इमारतें खड़ी हो रही हैं, कॉलोनियां बस रही हैं और नगर में प्रवेश करते ही स्वागत के होर्डिंग विकास की तस्वीर पेश करते हैं। लेकिन नगर की दहलीज पर कदम रखते ही गोविंद पैलेस के समीप पुराने स्टेट हाईवे (SH-27) पर भरा बारिश का पानी इन दावों की सच्चाई बयान कर देता है। पहली ही बारिश में सड़क तालाब में तब्दील हो जाती है और हजारों राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

यह केवल जलभराव की खबर नहीं है, बल्कि उन सवालों की पड़ताल है जिनके जवाब आज तक किसी जिम्मेदार विभाग ने नहीं दिए।

2023 में पुलिया थी… आज आखिर कहां गई?

मामले की पड़ताल में मई 2023 की गूगल स्ट्रीट व्यू तस्वीर सामने आई है। इस तस्वीर में गोविंद पैलेस के समीप सड़क किनारे जल निकासी के लिए बनी पुलिया स्पष्ट दिखाई देती है। उसी समय होटल का निर्माण कार्य भी जारी था।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बाद में सड़क किनारे मुरूम भरकर लेवल बढ़ा दिया गया, जिससे पुलिया पूरी तरह दब गई और बारिश के पानी का प्राकृतिक निकास बंद हो गया। इसके बाद से हर मानसून में यही स्थान जलभराव का केंद्र बन गया।

यदि पुलिया वास्तव में दब गई, तो सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिना वैकल्पिक जल निकासी व्यवस्था किए ऐसा कैसे हुआ? क्या संबंधित विभागों ने इसकी अनुमति दी थी? यदि नहीं, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है?

सरकारी दस्तावेज ने भी स्वीकार की समस्या

इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण तथ्य 22 मई 2026 को नगर पालिका परिषद बड़वाह द्वारा मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत बड़वाह को भेजा गया आधिकारिक पत्र है।

इस पत्र में नगर पालिका ने स्पष्ट लिखा है कि जनपद पंचायत के अधीनस्थ ग्राम पंचायत द्वारा गोविंद पैलेस एवं अलका पार्क कॉलोनी के निर्माण की अनुमति (एनओसी) जारी की गई थी। पत्र में यह भी उल्लेख है कि इसके बाद से प्रतिवर्ष मुख्य मार्ग पर जलभराव की स्थिति निर्मित हो रही है, जिससे आवागमन प्रभावित होता है। नगर पालिका ने जनपद पंचायत से जल निकासी की समुचित व्यवस्था कराने का अनुरोध भी किया है।

जब स्वयं एक सरकारी विभाग लिखित रूप में समस्या स्वीकार कर चुका है, तब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि एक वर्ष बाद भी स्थायी समाधान क्यों नहीं हो पाया?

हर वर्ष वही समस्या, हर बार अस्थायी समाधान

यह कोई पहली बार नहीं हुआ। पिछले वर्ष भी इसी स्थान पर कई बार जलभराव हुआ था। लगातार शिकायतों और समाचार प्रकाशित होने के बाद प्रशासन ने केवल अस्थायी कच्ची नाली बनाकर पानी निकासी की व्यवस्था कर दी थी।

लेकिन पहली ही बारिश ने उस व्यवस्था की वास्तविकता उजागर कर दी। अस्थायी उपाय समाप्त हो गए और समस्या पहले की तरह फिर सामने आ गई।

मुख्य मार्ग पर बढ़ता खतरा

इंदौर–इच्छापुर नेशनल हाईवे का निर्माण कार्य अभी पूरी तरह पूर्ण नहीं हुआ है। इसके कारण भारी मालवाहक वाहनों सहित अधिकांश यातायात आज भी पुराने स्टेट हाईवे (SH-27) वाले इसी मार्ग से होकर गुजरते है।

बारिश के दौरान जलभराव होने पर भारी वाहनों के बीच दोपहिया वाहन चालकों, पैदल राहगीरों और स्कूली बच्चों के लिए जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। तेज रफ्तार वाहनों से उछलता गंदा पानी लोगों की परेशानी को और बढ़ा देता है।

जलभराव के बीच बिजली की डीपी, क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार?

जहां जलभराव होता है, वहीं सड़क किनारे विद्युत वितरण कंपनी की डीपी भी स्थापित है। यदि बारिश के दौरान डीपी में स्पार्किंग, शॉर्ट सर्किट या कोई अन्य तकनीकी खराबी उत्पन्न होती है, तो वहां मौजूद लोगों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि भविष्य में कोई अप्रिय घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा? क्या संबंधित विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं?

विभागों में जिम्मेदारी तय नहीं, भुगत रही जनता

नगर पालिका का कहना है कि संबंधित क्षेत्र ग्राम पंचायत सिरलाय के अधिकार क्षेत्र में आता है। दूसरी ओर जिस मुख्य सड़क पर जलभराव हो रहा है, वह पहले एमपीआरडीसी और वर्तमान में एनएचएआई के अधीन बताई जा रही है।

ऐसे में एक विभाग दूसरे विभाग की ओर जिम्मेदारी बढ़ा रहा है, लेकिन हर बारिश में परेशानी आम नागरिक झेल रहे हैं। सरकारी पत्राचार तो हो रहा है, लेकिन जमीन पर स्थायी समाधान आज भी दिखाई नहीं देता।

अब जवाब चाहिए

यह मामला केवल सड़क पर पानी भरने तक सीमित नहीं है। यह जनसुरक्षा, प्रशासनिक जवाबदेही और योजनाबद्ध विकास पर भी बड़ा सवाल है।

यदि 2023 में पुलिया मौजूद थी तो आज वह कहां है?

यदि निर्माण के बाद जलभराव शुरू हुआ, जैसा कि नगर पालिका ने अपने पत्र में लिखा है, तो उसके लिए जिम्मेदार कौन है?

यदि समस्या की जानकारी संबंधित विभागों को पहले से थी, तो आज तक स्थायी जल निकासी व्यवस्था क्यों नहीं बनाई गई?

और सबसे महत्वपूर्ण सवाल… यदि कल इस जलभराव, भारी यातायात या सड़क किनारे लगी बिजली की डीपी के कारण कोई बड़ा हादसा हो जाता है, तो क्या जिम्मेदार अधिकारी केवल एक और पत्र लिखकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेंगे?

बड़वाह की जनता अब आश्वासन नहीं, जवाब और स्थायी समाधान चाहती है। क्योंकि हर वर्ष पहली बारिश केवल सड़क को नहीं डुबोती, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की खामियों को भी उजागर कर देती है।

ASUS Vivobook Laptop Buy Now

Leave a Reply

You missed

📢 The India Speaks में रिपोर्टर भर्ती शुरू!

क्या आपके पास खबरों की समझ है? क्या आप अपने क्षेत्र की सच्चाई सामने लाना चाहते हैं?

🔍 The India Speaks अपने नेटवर्क के विस्तार के लिए स्थानीय रिपोर्टर नियुक्त कर रहा है।

✍️ ज़िम्मेदारियां:

✅ पात्रता:

💼 लाभ:

📲 आवेदन करें:

📧 ईमेल: editor@theindiaspeaks.com
📞 मोबाइल: 7772828778

⚠️ यह भर्ती केवल गंभीर और ज़िम्मेदार अभ्यर्थियों के लिए है। स्थान सीमित हैं।